साहित्य दुनिया सीरीज़ (11): बरसात पर 10 शा’इरों के 10 शेर

1.
याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था

नासिर काज़मी

2.
आसमाँ ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से
इतनी बारिश एक शोले को बुझाने के लिए

ज़फ़र गोरखपुरी

3.
तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे

जमाल एहसनी

4.
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमड़ती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है

गुलज़ार

5.
गर कभी रोना ही पड़ जाए तो इतना रोना
आ के बरसात तिरे सामने तौबा कर ले

मुनव्वर राणा

6.
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

निदा फ़ाज़ली

7.
किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी,
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी

आरज़ू लखनऊ

8.
उग रहा है दर-ओ-दीवार से सब्ज़ा ‘ग़ालिब’,
हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है

मिर्ज़ा ग़ालिब

9.
अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई,
मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई

गोपाल दास नीरज

10.
ऐ दीदा-ए-तर तुम भी झड़ी अपनी लगा दो
इस साल तो बरसात में बरसात की ठहरे

ग़ुलाम हमदनी ‘मुस’हफ़ी’

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