साहित्य दुनिया सीरीज़ (13): 10 शा’इरों के 10 शेर

1.
आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये

मीर तक़ी मीर

2.
रात आई उधर सितारों ने
शबनमी पैरहन लिबास किया

रसा चुग़ताई

3.
दुश्मन-ए-जाँ कई क़बीले हुए
फिर भी ख़ुशबू के हाथ पीले हुए

नोशी गिलानी

4.
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

मिर्ज़ा ग़ालिब

5.
दुनिया बस इस से और ज़ियादा नहीं है कुछ
कुछ रोज़ हैं गुज़ारने और कुछ गुज़र गए

हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

6.
आख़री हिचकी तिरे ज़ानूँ पे आए,
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूँ

क़तील शिफ़ाई

7.
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

अहमद फ़राज़

8.
अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब,
अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं

साहिर लुधियानवी

9.
आज फिर गर्दिश-ए-तक़दीर पे रोना आया ,
दिल की बिगड़ी हुई तस्वीर पे रोना आया

शकील बदायूँनी

10.
दाम-ए-उल्फ़त से छूटती ही नहीं,
ज़िंदगी तुझ को भूलती ही नहीं

शहरयार

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