साहित्य दुनिया सीरीज़ (4): 10 शा’इर, 10 शे’र..

साहित्य दुनिया की इस विशेष सीरीज़ में हम आज जिन 10 शा’इरों के शे’र आपके सामने पेश कर रहे हैं वो हैं क़तील शिफ़ाई, आरज़ू लखनवी, असरार उल हक़ मजाज़,मुनीर नियाज़ी, सलीम कौसर, माधव राम जौहर, ज़हरा निगाह, साहिर लुधियानवी, परवीन शाकिर और अमीर मीनाई.

1.
अहबाब को दे रहा हूँ धोका
चेहरे पे ख़ुशी सजा रहा हूँ

क़तील शिफ़ाई

2.
भोली बातों पे तेरी दिल को यक़ीं,
पहले आता था अब नहीं आता

आरज़ू लखनवी

3.
छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर
अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है

असरार उल-हक़ मजाज़

4.
रात इक उजड़े मकाँ पर जा के जब आवाज़ दी
गूँज उट्ठे बाम-ओ-दर मेरी सदा के सामने

मुनीर नियाज़ी

5.
और इस से पहले कि साबित हो जुर्म-ए-ख़ामोशी
हम अपनी राय का इज़हार करना चाहते हैं

सलीम कौसर

6.
आप तो मुँह फेर कर कहते हैं आने के लिए
वस्ल का वादा ज़रा आँखें मिला कर कीजिए

माधव राम जौहर

7.
अपना हर अंदाज़ आँखों को तर-ओ-ताज़ा लगा,
कितने दिन के बा’द मुझ को आईना अच्छा लगा

ज़हरा निगाह

8.
चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

साहिर लुधियानवी

9.
अपने क़ातिल की ज़हानत से परेशान हूँ मैं
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे

परवीन शाकिर

10.
अभी आए अभी जाते हो जल्दी क्या है दम ले लो
न छेड़ूँगा मैं जैसी चाहे तुम मुझ से क़सम ले लो

अमीर मीनाई

*फ़ोटो क्रेडिट (फ़ीचर्ड इमेज)- नेहा शर्मा

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