परिचर्चा 2 में ‘हिन्दी साहित्यिक विधाओं में महिलाओं की कमी’ और ‘भाषा का विज्ञान’ विषयों पर हुई चर्चा

साहित्य दुनिया और जस्ट बुक्स अंधेरी की ओर से गुज़िश्ता रविवार को आयोजित की गई परिचर्चा में दो विषयों पर चर्चा की गई- ‘हिन्दी साहित्यिक विधाओं में महिलाओं की कमी’ और ‘भाषा का विज्ञान’

‘हिन्दी साहित्यिक विधाओं में महिलाओं की कमी’ विषय पर बोलते हुए राजुल अशोक जी ने कहा कि महिलाओं ने अलग-अलग विधाओं में लिखा है लेकिन कुछ विधाएँ ऐसी भी हैं जिन पर महिलाओं ने कम या फिर न के बराबर लिखा है। राजुल जी ने बताया कि किस प्रकार महिलाओं ने लेखन के क्षेत्र में शुरुआत की। उन्होंने भारत में महिला लेखन को तीन भाग में विभाजित किया- आज़ादी से पहले, आज़ादी के बाद और समकालीन। राजुल जी ने हिन्दी के अलावा पंजाबी और उर्दू लेखिकाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह से लेखिकाओं ने समाजिक विरोध का सामना करके क़दम आगे बढ़ाए। इस बारे में टिप्पणी करते हुए अशोक हमराही जी ने कहा कि महिलाओं को कई बार लिखने का मौक़ा ही नहीं मिल पाता इस वजह से कई कहानियाँ उनके ज़हन में पैदा होकर ज़हन में ही मर जाती हैं।

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‘भाषा का विज्ञान’ विषय पर बात करते हुए अशोक हमराही जी ने कहा कि हर भाषा का अपना विज्ञान है लेकिन हिन्दी ही एकमात्र भाषा है जिसकी लिपि में हर आवाज़ मौजूद है। उन्होंने बताया कि किस तरह से ‘स’, ‘श’ और ‘ष’ के उच्चारण में फ़र्क़ है और कैसे इसका सही उच्चारण किया जा सकता है। अशोक जी ने बताया कि हर शब्द का अपना एक महत्व है। इस बात को उन्होंने ‘ज़िम्मेदारी’ और ‘दायित्व’ में अंतर बताने के साथ समझाया।

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जस्ट बुक्स में हुई इस परिचर्चा में अलग-अलग भाषाओं के जानने वाले लोग शामिल हुए। दोनों वक्ताओं ने ज़ोर डालते हुए कहा कि सभी को अपनी मातृ भाषा बोलनी चाहिए, अगर ऐसा न हुआ तो भाषाएँ ग़ायब होने लगेंगी। कार्यक्रम के अंत में राजुल अशोक जी और अशोक हमराही जी ने लाइब्रेरी के कलेक्शन को देखा और साहित्य दुनिया-जस्ट बुक्स की पहल की तारीफ़ की.

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