हिन्दी व्याकरण: “है” और “हैं” का प्रयोग
है और हैं का प्रयोग –
“है” और “हैं” हिंदी भाषा में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले सहायक क्रियापदों में शामिल हैं। इनके सही प्रयोग को लेकर अक्सर भ्रम होता है। सामान्यतः “है” का प्रयोग एकवचन के साथ और “हैं” का प्रयोग बहुवचन के साथ किया जाता है, लेकिन आदर प्रकट करने के लिए एकवचन व्यक्ति के साथ भी “हैं” का प्रयोग होता है।
इस लेख में “है” और “हैं” के प्रयोग, उनके उच्चारण और एकवचन-बहुवचन के आधार पर इनके अंतर को आसान उदाहरणों के साथ समझाया गया है।
“है” और “हैं” का उच्चारण
“है”और “हैं” में फ़र्क़ है सिर्फ़ एक बिन्दू का, लेकिन इस एक छोटी-सी बिन्दू का भी बहुत महत्व है। इस एक बिन्दू के होने की वजह से उच्चारण में भी अंतर आता है।
“है” के उच्चारण के लिए सुन सकते हैं 1977 में आयी फ़िल्म “हम किसी से कम नहीं” का गीत “है अगर दुश्मन ज़माना ग़म नहीं” इस गीत की शुरुआत में ही आपको “है” का उच्चारण पता चल जाएगा।”हैं” के उच्चारण के लिए सुनिए 1973 की फ़िल्म “नमक हराम” का गीत “दिये जलते हैं फूल खिलते हैं” मुखड़े में ही आपको तीन बार “हैं” का उच्चारण सुनने मिलेगा।
अब आप इसे सुन लें तो साथ ही साथ दो-तीन बार दोहरा लें..गाने का गाना हो जाएगा और “है” और “हैं” का अभ्यास भी।
प्रयोग
उच्चारण का अंतर जानने के बाद आपको “है” और “हैं” में फ़र्क़ तो समझ आ ही गया होगा। तो हम अब ये जानते हैं कि किस वाक्य में “है” लगेगा और किसमें “हैं”
अगर आप ग़ौर से देखें तो आपको ये पता चलेगा कि अब तक जितने भी वाक्यों में “है” का प्रयोग हुआ है वो सभी ऐसे वाक्य हैं जिनमें संज्ञा शब्द एकवचन वाले थे, मतलब उन वाक्यों में किसी एक व्यक्ति, एक वस्तु, एक स्थान आदि की बात हो रही है। इसी तरह “हैं” का प्रयोग उन वाक्यों में हुआ है जिनमें एक से अधिक व्यक्ति, वस्तु या स्थान की बात है याने कि संज्ञा शब्द बहुवचन वाले थे।वचन के बारे में विस्तार से आपको कभी और ज़रूर बताएँगे, फ़िलहाल ये बता दें कि वचन किसी संज्ञा शब्द का वो रूप होता है जिससे उसकी संख्या (एक या ज़्यादा) का पता चलता है। वचन दो तरह के होते हैं: एकवचन और बहुवचन
अगर संख्या एक है तो एकवचन और अगर ज़्यादा है तो बहुवचन। अब इस बात को ऊपरी तौर पर समझने के लिए हम कुछ एकवचन और बहुवचन वाले शब्दों के उदाहरण देख लेते हैं:
“है” और “हैं” के उदाहरण
एकवचन– कली, मछली, दवाई, बकरी, लड़की, बच्चा, कविता आदि।
बहुवचन– कलियों, मछलियों, दवाइयाँ, बकरियाँ, लड़कियाँ, बच्चे, कविताएँ आदि।
जो भी शब्द “एकवचन” वाले हैं उनके लिए बने वाक्य में “है” का प्रयोग होगा। इसे यूँ भी समझा जा सकता है कि जिसमें एक ही व्यक्ति, वस्तु या स्थान की बात हो वहाँ “है” लगाया जाता है।
इसी तरह जो शब्द “बहुवचन” वाले हैं उनके लिए वाक्य बनाते समय “हैं” का प्रयोग होगा। कहने का अर्थ है कि जब एक से ज़्यादा व्यक्ति, वस्तु या स्थान की बात हो वहाँ “हैं” लगाया जाएगा।
अब इस बात को उदाहरण से समझते “हैं” (इस वाक्य में “हैं” इसलिए लगा क्योंकि यहाँ “हम” समझने वाले हैं, अगर “मैं या तुम” होता तो “है” लगता)
उदाहरण
1- ये कली ख़ूबसूरत है
ये कलियाँ ख़ूबसूरत हैं
2- मछली जल में तैरती है।
मछलियाँ जल में तैरती हैं
3- दवाई बहुत कड़वी है
दवाइयाँ बहुत कड़वी हैं
4- आँगन में बकरी घुस आयी है
आँगन में बकरियाँ घुस आयीं हैं
5- लड़की घर के आँगन में खेल रही है
लड़कियाँ मैदान में खेल रही हैं।
6-बच्चा शोर मचा रहा है।
बच्चे शोर मचा रहे हैं
7- उसकी कविता छपी है।
उसकी कविताएँ छपी हैं
याद रखने योग्य बातें:
1- है उन वाक्यों के अंत में लगता है जिसमें संज्ञा एकवचन में हो।
2- हैं उन वाक्यों के अंत में लगता है जिसमें संज्ञा बहुवचन में हो।
3- “है” का प्रयोग केवल एकवचन के लिए ही होता है लेकिन “हैं” का प्रयोग कुछ एकवचन संज्ञा शब्दों के साथ भी होता है।
4- “हैं” का प्रयोग एकवचन के उस संज्ञा के साथ भी होता है जहाँ किसी के प्रति आदर प्रकट किया जा रहा हो: जैसे: आप, दादाजी, दादीजी, शिक्षक- शिक्षिका, माता-पिता या कोई और बड़े व्यक्ति जिनका सम्मान किया जाए।
उदाहरण: दादाजी बैठे हैं और दादीजी अख़बार पढ़ रही हैं।
पिताजी घर के काम में माँ का हाथ बँटाते हैं और माँ उनके ऑफ़िस का काम कर देती हैं।
आप कहाँ जा रहे हैं?
आज का ये अध्याय तो यहीं समाप्त करते हैं, अगली बार मिलेंगे व्याकरण के किसी नयी बात के साथ।
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