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Hindi Vyakaran mein Ki aur Ka ka prayog: किसी भी भाषा को आसानी से लिखने-पढ़ने और समझने के लिए ज़रूरी है कि उस भाषा के व्याकरण की जानकारी हो…हिंदी वैसे तो हमारी मातृभाषा है और भारत में ज़्यादातर जगह बोली भी जाती है, तो उसमें कई राज्यों और बोलियों का समावेश भी हुआ है और हम अक्सर बहुत से शब्दों के प्रयोग में भी उलझते हैं। जैसे उर्दू भाषा में एक नुक़्ते की ग़लती अर्थ का अनर्थ कर सकती है वैसा ही कुछ मामला हिंदी में मात्राओं को लेकर है।

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हिंदी में अधिकांश मात्राएँ छोटी और बड़ी दोनों होने के कारण कई बार किस जगह कौन-सी मात्रा लगनी चाहिए ये बात उलझन बढ़ाती है। ऐसा ही एक उदाहरण है “की और कि” का।

Hindi Vyakaran: “की” और “कि” का प्रयोग

“की” और “कि” में सिर्फ़ मात्राओं का अंतर है लेकिन इस अंतर से ही इसके प्रयोग के नियम भी निर्धारित होते हैं:
“की” (ई की मात्रा) का प्रयोग-  “की” (ई की मात्रा) का प्रयोग ऐसी जगह होता है जहाँ संज्ञा या सर्वनाम का किसी से सम्बंध बताना हो। उदाहरण: रामू की सायकिल, कहानियों की किताब, देश की हालत, गुलाब की कली, कलकत्ता की गली, आदि

याद रखने योग्य बातें

-“की” (ई की मात्रा) का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम से सम्बंध बताने के लिए किया जाता है।
– “की” (ई की मात्रा) के बाद हमेशा कोई स्त्रीलिंग शब्द ही आता है।
– अगर “की” (ई की मात्रा) का प्रयोग संज्ञा के बाद हो तो “की” अलग लिखा जाता है।
जैसे: रामू(संज्ञा) की सायकिल, कहानी की किताब आदि।
-सर्वनाम के बाद “की” (ई की मात्रा) का प्रयोग हो तो “की” सर्वनाम शब्द के साथ जुड़ जाता है।
जैसे- आपकी, उनकी, उसकी, जिसकी आदि।

Hindi Vyakaran: “कि” (इ की मात्रा) का प्रयोग-  

“कि” (इ की मात्रा) का प्रयोग दो वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ने के लिए किया जाता है और “कि” (इ की मात्रा) मुख्य वाक्य को आश्रित वाक्य से जोड़ता है।
उदाहरण: मैंने कह दिया है कि उसे आना हो तो आए.
यहाँ “मैंने कह दिया” एक वाक्य है और “उसे आना हो तो आए” दूसरा वाक्य, इन दोनों को जोड़ने के लिए बीच में “कि” (इ की मात्रा) लगाया गया और इससे ये पूरा वाक्य बना। “मैंने कह दिया है” से वाक्य तो पूरा था लेकिन एक उत्सुकता बनी हुई थी कि क्या कहा है, जब भी वाक्य बनाते समय  प्रश्न बने तो भी “कि” (इ की मात्रा) लगता है।

याद रखने योग्य बातें

-“कि” (इ की मात्रा) का प्रयोग दो वाक्यों को जोड़ने में होता है।
-वाक्य बनाते समय कोई प्रश्न बने तो “कि” (इ की मात्रा) का प्रयोग होता है।
-“कि” (इ की मात्रा) का प्रयोग विभाजन के लिए भी होता है जैसे “या” शब्द इस्तेमाल किया जाता
है उसी तरह “कि” (इ की मात्रा) भी प्रयोग किया जा सकता है।
जैसे- तुम क्या पसंद करते हो बारिश कि ठंड, तुम अभी खाओगे कि सोओगे आदि।
-“कि” (इ की मात्रा) का प्रयोग ज़्यादातर क्रिया के बाद ही होता है।
जैसे- ऊपर वाले उदाहरण में “करते हो” और “खाओगे”

व्याकरण “की” इस छोटी-सी सरल बात का आपको फ़ायदा हुआ “कि” नहीं, हमें ज़रूर बताइएगा।

2 thoughts on “हिन्दी व्याकरण: “की” और “कि” का प्रयोग”

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