ताबिश देहलवी की शायरी
अभी हैं क़ुर्ब के कुछ और मरहले बाक़ी कि तुझको पा के हमें फिर तिरी तमन्ना है _______ छोटी पड़ती...
अभी हैं क़ुर्ब के कुछ और मरहले बाक़ी कि तुझको पा के हमें फिर तिरी तमन्ना है _______ छोटी पड़ती...
उनका अंतिम धनुष (His Last Bow in Hindi) - आर्थर कॉनन डॉयल 2 अगस्त की रात के नौ बजे...
यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके-चुपके पढ़ा...
तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद तू है...
Ahmad Salman Shayari जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे जब अपनी अपनी...
ये ज़ाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है, कोई जो दूसरा पहने तो दूसरा ही लगे बशीर बद्र —— उजाले अपनी...
मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं...
अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें "हालातों", "जज़्बातों" या...
Teesri Qasam Renu हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी।...
मैक्सिम गोर्की की कहानी - कोलुशा क़ब्रिस्तान का वह कोना, जहाँ भिखारी दफ़नाये जाते हैं। पत्तों से छितरे, बारिश से...