साहित्य दुनिया

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो – बशीर बद्र

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके-चुपके पढ़ा...

तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद – फ़रहत अब्बास शाह

तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद तू है...

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है – सलीम कौसर

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं...

उर्दू शायरी और शब्द: हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें "हालातों", "जज़्बातों" या...

तीसरी क़सम – फणीश्वरनाथ रेणु

Teesri Qasam Renu हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी।...

कोलुशा – मैक्सिम गोर्की

मैक्सिम गोर्की की कहानी - कोलुशा क़ब्रिस्तान का वह कोना, जहाँ भिखारी दफ़नाये जाते हैं। पत्तों से छितरे, बारिश से...