नज़्म

वो हँसती है तो उसके हाथ रोते हैं – अब्बास ताबिश

किसी के ब'अद अपने हाथों की बद-सूरती में खो गई है वो मुझे कहती है 'ताबिश'! तुमने देखा मेरे हाथों...

हम देखेंगे – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है जब...

जुदाई की पहली रात – परवीन शाकिर

आँख बोझल है मगर नींद नहीं आती है मेरी गर्दन में हमाइल तिरी बाँहें जो नहीं किसी करवट भी मुझे...