शायरी

Shayari
‘साहित्य दुनिया’ के ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।

ज़ेब ग़ौरी के बेहतरीन शेर

जितना देखो उसे थकती नहीं आँखें वर्ना ख़त्म हो जाता है हर हुस्न कहानी की तरह __ ज़ख़्म ही तेरा...

तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद – फ़रहत अब्बास शाह

तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद तू है...

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है – सलीम कौसर

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं...