राजेश रेडी के बेहतरीन शेर
दिल भी इक ज़िद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ...
Shayari
‘साहित्य दुनिया’ के ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।
दिल भी इक ज़िद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ...
जितना देखो उसे थकती नहीं आँखें वर्ना ख़त्म हो जाता है हर हुस्न कहानी की तरह __ ज़ख़्म ही तेरा...
अभी हैं क़ुर्ब के कुछ और मरहले बाक़ी कि तुझको पा के हमें फिर तिरी तमन्ना है _______ छोटी पड़ती...
Bashir Badr Shayari यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है...
Amjad Islam Amjad Shayari चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन...
Anjum Rahbar Shayari आग बहते हुए पानी में लगाने आई तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई फिर तिरी...
तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद तू है...
Ahmad Salman Shayari जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे जब अपनी अपनी...
ये ज़ाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है, कोई जो दूसरा पहने तो दूसरा ही लगे बशीर बद्र —— उजाले अपनी...
मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं...