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ये ज़ाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है, कोई जो दूसरा पहने तो दूसरा ही लगे बशीर बद्र —— उजाले अपनी…

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“8 साल हो गए मेरी इस नौकरी को, 8 साल…क्या मिला? कुछ महीनों के ख़र्च के रुपए और कुछ उम्मीदें,…

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मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं…

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वर्कशॉप और इवेंट्स के दौरान…
वौइस् आर्टिस्ट और अभिनेता अमरिंदर सिंह सोढ़ी, विवा वौइस् अकादमी की संस्थापक वंदना सेन गुप्ता के साथ साहित्य दुनिया के संस्थापक नेहा शर्मा और अरग़वान रब्बही
जस्ट बुक्स अँधेरी में एक प्रोग्राम के बाद ली गयी तस्वीर
जब साहित्य दुनिया पहुँचा बच्चों के पास..
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नेहा शर्मा साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
मुंबई में साहित्य दुनिया की वर्कशॉप
जब साहित्य दुनिया पहुँचा बच्चों के पास..
विवा वौइस् अकादमी में साहित्य दुनिया की वर्कशॉप
जब साहित्य दुनिया पहुँचा बच्चों के पास..
अरग़वान रब्बही साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
नेहा शर्मा के साथ वंदना सेन गुप्ता
विवा वौइस् अकादमी में साहित्य दुनिया की वर्कशॉप
अरग़वान रब्बही साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
नेहा शर्मा साहित्य दुनिया की वर्कशॉप के दौरान
साहित्य दुनिया टीम
नेहा शर्मा (Neha Sharma)
अरग़वान रब्बही (Arghwan Rabbhi)
साहित्य दुनिया के बारे में

साहित्य दुनिया नेहा शर्मा और अरग़वान रब्बही का साझा प्रयास है. इसके ज़रिए कोशिश ये है कि लोगों की रूचि साहित्य और भाषा में बढ़े। ये साहित्य और भाषा से जुड़ी बातों को बड़े-बड़े और गम्भीर वाक्यों से न समझाकर उसे सरल, बोलचाल की भाषा में आम जन तक पहुँचाने का प्रयास है।

शायद यही कारण है कि साहित्य दुनिया को कम समय में ही पाठकों का ढेर सारा प्यार मिला है और लगातार मिल रहा है. साहित्य दुनिया की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई लेकिन जल्द ही साहित्य दुनिया ने मुंबई में अपनी वर्कशॉप और परिचर्चा आदि भी शुरू की है। ये एक ऐसा सिलसिला है जो अभी भी जारी है और इसे आगे बढ़ाने के लिए हम प्रयासरत हैं।

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