July 2, 2026

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यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो – बशीर बद्र

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके-चुपके पढ़ा...

तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद – फ़रहत अब्बास शाह

तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद तू है...