मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है – सलीम कौसर

सलीम कौसर

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ मैं नसीब हूँ किसी और का मुझे माँगता कोई और है अजब ए’तिबार ओ बे-ए’तिबारी के दरमियान है ज़िंदगी मैं क़रीब हूँ किसी और … Read more

सफ़र के वक़्त – जौन एलिया

Jaun Elia Best Sher

तुम्हारी याद मिरे दिल का दाग़ है लेकिन सफ़र के वक़्त तो बे-तरह याद आती हो बरस बरस की हो आदत का जब हिसाब तो फिर बहुत सताती हो जानम बहुत सताती हो मैं भूल जाऊँ मगर कैसे भूल जाऊँ भला अज़ाब-ए-जाँ की हक़ीक़त का अपनी अफ़्साना मिरे सफ़र के वो लम्हे तुम्हारी पुर-हाली वो … Read more

उर्दू शायरी और शब्द: हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

है और हैं का प्रयोग Urdu Ke Mushkil Shabd Urdu Hindi Nuqte Wale हिन्दी व्याकरण इ और ई Ghazal Kya hai Children Story in Hindi

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें “हालातों”, “जज़्बातों” या “अल्फ़ाज़ों” का इस्तेमाल होता है जबकि ये पूरी तरह से ग़लत है। हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे कारण क्या है। अस्ल में “हाल” शब्द का अर्थ होता है “अवस्था” या “स्थिति” (condition)। इस … Read more

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम – मोमिन ख़ाँ मोमिन

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम पर क्या करें कि हो गए नाचार जी से हम हँसते जो देखते हैं किसी को किसी से हम मुँह देख देख रोते हैं किस बे-कसी से हम हम से न बोलो तुम इसे क्या कहते हैं भला इंसाफ़ कीजे पूछते हैं आप ही से … Read more

अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से – परवीन शाकिर

Parveen Shakir Best Sher

अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से ज़मीं की ख़ैर माँगें आसमाँ से अगर चाहें तो वो दीवार कर दें हमें अब कुछ नहीं कहना ज़बाँ से सितारा ही नहीं जब साथ देता तो कश्ती काम ले क्या बादबाँ से भटकने से मिले फ़ुर्सत तो पूछें पता मंज़िल का मीर-ए-कारवाँ से तवज्जोह बर्क़ की हासिल रही … Read more

दिल धड़कने का सबब याद आया – नासिर काज़मी

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त तू मुसीबत में अजब याद आया दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से फिर तिरा वादा-ए-शब याद आया तेरा भूला हुआ पैमान-ए-वफ़ा मर रहेंगे अगर अब याद आया फिर कई लोग नज़र से गुज़रे फिर कोई शहर-ए-तरब … Read more

भली सी एक शक्ल थी – अहमद फ़राज़

Ahmad Faraz Best Shayari

भले दिनों की बात है भली सी एक शक्ल थी न ये कि हुस्न-ए-ताम हो न देखने में आम सी न ये कि वो चले तो कहकशाँ सी रहगुज़र लगे मगर वो साथ हो तो फिर भला भला सफ़र लगे कोई भी रुत हो उसकी छब फ़ज़ा का रंग-रूप थी वो गर्मियों की छाँव थी … Read more

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है – परवीन शाकिर की ग़ज़ल

Parveen Shakir Best Sher

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है मुझ पे एहसान हवा करती है चूम कर फूल को आहिस्ता से मो’जिज़ा बाद-ए-सबा करती है खोल कर बंद-ए-क़बा गुल के हवा आज ख़ुश्बू को रिहा करती है अब्र बरसे तो इनायत उस की शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है ज़िंदगी फिर से फ़ज़ा में रौशन मिशअल-ए-बर्ग-ए-हिना करती है … Read more

तीसरी क़सम – फणीश्वरनाथ रेणु

Phaneeshwar Nath Renu

हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार मोरंगराज नेपाल से धान और लकड़ी ढो चुका है। कंट्रोल के ज़माने में चोरबाज़ारी का माल इस पार से उस पार पहुँचाया है। लेकिन कभी तो ऐसी गुदगुदी नहीं लगी पीठ में! कंट्रोल का … Read more

मन बहुत सोचता है – अज्ञेय

मन बहुत सोचता है कि उदास न हो पर उदासी के बिना रहा कैसे जाए? शहर के दूर के तनाव-दबाव कोई सह भी ले, पर यह अपने ही रचे एकांत का दबाव सहा कैसे जाए! नील आकाश, तैरते-से मेघ के टुकड़े, खुली घास में दौड़ती मेघ-छायाएँ, पहाड़ी नदी : पारदर्श पानी, धूप-धुले तल के रंगारंग … Read more