अभिषेक शुक्ला के बेहतरीन शेर…
Abhishek Shukla Shayari मक़ाम-ए-वस्ल तो अर्ज़-ओ-समा के बीच में है मैं इस ज़मीन से निकलूँ तू आसमाँ से निकल अभिषेक...
Abhishek Shukla Shayari मक़ाम-ए-वस्ल तो अर्ज़-ओ-समा के बीच में है मैं इस ज़मीन से निकलूँ तू आसमाँ से निकल अभिषेक...