वज़ीर आग़ा की ग़ज़ल: “ऐसे गए कि फिर न कभी लौटना हुआ…”
wazeer aagha ghazal : बादल छटे तो रात का हर ज़ख़्म वा हुआ आँसू रुके तो आँख में महशर बपा हुआ ऐसे बढ़े कि मंज़िलें रस्ते में बिछ गईं ऐसे गए कि फिर न कभी लौटना हुआ ऐ जुस्तुजू कहाँ गए वो हौसले तिरे किस दश्त में ख़राब तिरा क़ाफ़िला हुआ पहुँचे पस-ए-ख़याल तो देखा … Read more