बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी…. बहादुर शाह ज़फ़र

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार बे-क़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी उसकी आँखों …

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