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Mohabbat Shayari, Girl Friend ShayariMohabbat Shayari

Mohabbat Shayari

गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा
गर जीत गए तो क्या कहना हारे भी तो बाज़ी मात नहीं

फ़ैज़ अहमद “फ़ैज़” (Faiz Ahmed Faiz)

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दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है

मिर्ज़ा ग़ालिब
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हमने दिल दे भी दिया अहद ए वफ़ा ले भी लिया,
आप अब शौक़ से दे लें जो सज़ा देते हैं

साहिर लुधियानवी (Sahir)

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हिकायत ए ग़म ए दुनिया तवील थी कह दी,
हिकायत ए ग़म ए दिल मुख़्तसर है क्या कहिए

ज़ेहरा निगाह (Zehra Nigah)
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आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें
हम मुहब्बत से मुहब्बत का सिला देते हैं

साहिर लुधियानवी (Sahir)

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इक लफ़्ज़-ए-मुहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है

जिगर मुरादाबादी (Jigar Moradabadi)

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नज़र मिला के मिरे पास आ के लूट लिया
नज़र हटी थी कि फिर मुस्कुरा के लूट लिया

जिगर मुरादाबादी (Jigar)

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आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक

मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib)

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सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता

अमीर मीनाई (Ameer Minai)

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हाँ याद मुझे तुम कर लेना आवाज़ मुझे तुम दे लेना
इस राह-ए-मुहब्बत में कोई दरपेश जो मुश्किल आ जाए

बहज़ाद लखनवी (Behzad Lucknowi)
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हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है
रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है

जिगर मुरादाबादी (Jigar Moradabadi)

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आपके बा’द हर घड़ी हम ने
आपके साथ ही गुज़ारी है

गुलज़ार (Gulzar)
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वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

परवीन शाकिर (Parveen Shakir)

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इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

अकबर इलाहाबादी (Akbar Ilahabadi)

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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी

परवीन शाकिर (Parveen Shakir)

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तुमको आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझको ग़ुस्से पे प्यार आता है

अमीर मीनाई (Ameer Minai)

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ये इश्क़ भी अजब कि एक शख़्स से
मुझे लगा कि हो गया हुआ नहीं

तहज़ीब हाफ़ी (Tehzeeb Hafi)
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तेरे बिन घड़ियाँ गिनी हैं रात दिन
नौ बरस ग्यारह महीने सात दिन

रहमान फ़ारिस (Rehman Faris)

_______ Mohabbat Shayari

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

परवीन शाकिर (Parveen Shakir)
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अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए

उबैदुल्लाह अलीम (Obaidullah Aleem)

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इश्क़ का इम्तिहान ख़ामोशी
दिल धड़कता है, जान ख़ामोशी

अरग़वान रब्बही (Arghwan Rabbhi)

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और भी दुख हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (Faiz Ahmad Faiz)

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चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है

हसरत मोहानी (Hasrat Mohani)

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

बशीर बद्र (Bashir Badr)

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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

जिगर मुरादाबादी (Jigar Moradabadi)

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तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

अल्लामा इक़बाल (Allama Iqbal)

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मुहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib)

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तेरी ख़ुश्बू का पता करती है
मुझपे एहसान हवा करती है

परवीन शाकिर (Parveen Shakir)

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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

अहमद फ़राज़ (Ahmad Faraz)

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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

अहमद फ़राज़ (Ahmad Faraz)

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उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

राहत इंदौरी (Rahat Indori)

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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

निदा फ़ाज़ली (Nida Fazli)

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चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

हसरत मोहानी (Hasrat Mohani)

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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

बशीर बद्र (Bashir Badr)

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हुआ है तुझसे बिछड़ने के बा’द ये मा’लूम
कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी

अहमद फ़राज़ (Ahmad Faraz)

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दोनों जहान तेरी मुहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (Faiz Ahmad Faiz)

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गिला भी तुझसे बहुत है मगर मुहब्बत भी
वो बात अपनी जगह है ये बात अपनी जगह

बासिर सुल्तान काज़मी (Basir Sultan Kazmi)

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तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
तुझसे मिल कर उदास रहता हूँ

साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi)

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मुहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला

बशीर बद्र (Bashir Badr)

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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib)

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हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ

क़तील शिफ़ाई (Qateel Shifai)

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अच्छे ईसा हो मरीज़ों का ख़याल अच्छा है
हम मरे जाते हैं तुम कहते हो हाल अच्छा है

अमीर मीनाई (Ameer Minai)

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Mohabbat Shayari

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