हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है – मिर्ज़ा ग़ालिब

Ghalib Ke Baare Mein Parag Agrawal Ghalib Aur Zauq ki Ghazalen Baazeecha E Atfal Ghalib Aaina Kyun Na Doon Aah Ko Chahiye Ik

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो’ले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा कोई बताओ कि वो शोख़-ए-तुंद-ख़ू क्या है ये रश्क है कि वो होता है हम-सुख़न तुम से वगर्ना ख़ौफ़-ए-बद-आमोज़ी-ए-अदू क्या है चिपक रहा है बदन पर लहू … Read more

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए – परवीन शाकिर

Parveen Shakir Best Sher

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए मौसम के हाथ भीग के सफ़्फ़ाक हो गए बादल को क्या ख़बर है कि बारिश की चाह में कैसे बुलंद-ओ-बाला शजर ख़ाक हो गए जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए लहरा रही है बर्फ़ की चादर … Read more

हम देखेंगे – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गिराँ रूई की तरह उड़ जाएँगे हम महकूमों के पाँव-तले जब धरती धड़-धड़ धड़केगी और अहल-ए-हकम के सर-ऊपर जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से सब बुत उठवाए जाएँगे हम अहल-ए-सफ़ा … Read more

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं – अब्बास ताबिश

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं दुनिया भी गई इश्क़ में तुझ से भी गया मैं इक सोच में गुम हूँ तिरी दीवार से लग कर मंज़िल पे पहुँच कर भी ठिकाने न लगा मैं वर्ना कोई कब गालियाँ देता है किसी को ये उस का करम है कि तुझे याद रहा … Read more

फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है – अजमल सिराज

फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है जो भी है आप का सब कुछ है हमारा क्या है हम ने कुछ ऐसी बना रक्खी है हालत अपनी पूछता कोई नहीं हाल तुम्हारा क्या है कुछ नहीं देखते कुछ भी हो तिरे दीवाने देखते हैं तिरी जानिब से इशारा क्या है दूर से जो नज़र … Read more

कहाँ हो तुम चले आओ मुहब्बत का तक़ाज़ा है – बहज़ाद लखनवी

कहाँ हो तुम चले आओ मुहब्बत का तक़ाज़ा है ग़म-ए-दुनिया से घबरा कर तुम्हें दिल ने पुकारा है तुम्हारी बे-रुख़ी इक दिन हमारी जान ले लेगी क़सम तुमको ज़रा सोचो कि दस्तूर-ए-वफ़ा किया है न जाने किस लिए दुनिया की नज़रें फिर गईं हम से तुम्हें देखा तुम्हें चाहा क़ुसूर इस के सिवा किया है … Read more

कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ – अहमद फ़राज़

Ranjish Hi Sahi

सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते वर्ना इतने तो मरासिम थे कि आते जाते शिकवा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से तो कहीं बेहतर था अपने हिस्से की कोई शम्अ’ जलाते जाते कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते जश्न-ए-मक़्तल ही न बरपा हुआ वर्ना हम भी पा-ब-जौलाँ ही … Read more

जुदाई की पहली रात – परवीन शाकिर

Parveen Shakir Best Sher

आँख बोझल है मगर नींद नहीं आती है मेरी गर्दन में हमाइल तिरी बाँहें जो नहीं किसी करवट भी मुझे चैन नहीं पड़ता है सर्द पड़ती हुई रात माँगने आई है फिर मुझ से तिरे नर्म बदन की गर्मी और दरीचों से झिझकती हुई आहिस्ता हवा खोजती है मिरे ग़म-ख़ाने में तेरी साँसों की गुलाबी … Read more

क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो

क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगा वो हम समझते थे कि हम उस को भुला सकते हैं वो समझता था हमें भूल नहीं पाएगा वो कितना सोचा था पर इतना तो नहीं सोचा था याद बन जाएगा वो ख़्वाब नज़र आएगा वो सब के होते हुए … Read more

अब वो मंजर, ना वो चेहरे ही नज़र आते हैं ~ अहमद फ़राज़

अब वो मंजर, ना वो चेहरे ही नज़र आते हैं मुझको मालूम ना था ख्वाब भी मर जाते हैं जाने किस हाल में हम हैं कि हमें देख के सब एक पल के लिये रुकते हैं गुज़र जाते हैं साकिया तूने तो मयख़ाने का ये हाल किया रिन्द अब मोहतसिबे-शहर के गुण गाते हैं जैसे … Read more