वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी
wo humsafar tha वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी कि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई न थी न अपना रंज न औरों का दुख न तेरा मलाल शब-ए-फ़िराक़ कभी हमने यूँ गँवाई न थी मुहब्बतों का सफ़र इस तरह भी गुज़रा था शिकस्ता-दिल थे मुसाफ़िर, शिकस्ता-पाई न थी अदावतें थीं, तग़ाफ़ुल था, … Read more