अहमद कमाल परवाज़ी के बेहतरीन शेर..
Ahmad Kamal Parwazi Best Sher वो अब तिजारती पहलू निकाल लेता है मैं कुछ कहूँ तो तराज़ू निकाल लेता है...
Ahmad Kamal Parwazi Best Sher वो अब तिजारती पहलू निकाल लेता है मैं कुछ कहूँ तो तराज़ू निकाल लेता है...
ताज़ा मुहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में है फिर मौसम-ए-बहार मिरे गुल्सिताँ में है इक ख़्वाब है कि बार-ए-दिगर देखते हैं...