पहाड़ी नमी वाली ख़ूशबू लिए मन को यात्रा के लिए खींचती है “स्पिती”
किताब दुनिया, spiti, Mahendra Singh
Spiti Review ~ पिछले दिनों हमने आपको ख़ूबसूरत तस्वीरों से भरी लद्दाख़ यात्रा की कहानी बताती एक कॉफ़ी टेबल बुक के बारे में बताया था।उसी किताब के साथ हमें मिली थी एक और किताब जिसका नाम है स्पिती। जी हाँ जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर है इस किताब में है हिमाचल प्रदेश के पास हिमालय की गोद में बसे स्पिती के बारे में । पहली किताब में जिस तरह से उल्लेख है लद्दाख़ का कुछ इसी तरह इस किताब में उल्लेख है स्पिती का, फिर भी ये किताब पहली किताब से अलग भी है कैसे? चलिए जानते हैं
लेखक महेंद्र सिंह इस यात्रा में अपनी पत्नी के साथ गए थे। वैसे तो स्पिती जाने के लिए मनाली और शिमला दोनों ही जगह से रास्ता है लेकिन लेखक ने मनाली का रास्ता चुना और हिंदुस्तान तिब्बत रोड से होते हुए स्पिती पहुँचे। इस रास्ते में उन्होने बर्फ़ीली पहाड़ियों के साथ-साथ बेहतरीन नज़ारे देखे और जैसा कि उनका अन्दाज़ है इस किताब। में भी ख़ूबसूरत तस्वीरों के ज़रिए पाठकों को भी स्पिती के ख़ूबसूरत दृश्य से रूबरू करवाया गया है।

इस किताब की ख़ास बात ये है कि इसमें स्पिती के रास्ते से जुड़ी तमाम जानकारियाँ तो हैं ही लेकिन वहाँ मिलने वाले जीवों की तस्वीरें इस यात्रा को हम तक सिर्फ़ एक दस्तावेज़ की तरह ही नहीं पहुँचने देती है बल्कि इसे जीवंत कर देती है। कई ऐसे वन्य जीवों की तस्वीरें देखकर मन ख़ुशी से झूम उठा और उन्हें उनके प्राकृतिक वातावरण में देखकर एक तसल्ली का एहसास भी हुआ। बर्फ़ीला चीता, हिमालय में पाया जाने वाला भूरा भालू और भी न जाने कितने प्यारे जीव और उनके साथ ही कुछ अवशेषों की तस्वीरें भी मानो वहाँ के वातावरण की ख़ूशबू पढ़ने वाले तक पहुँचती है।
पहाड़ों में बसने वाले गाँव और उनके घर किस तरह होते हैं ये भी हम देख पाते हैं। यही नहीं भारत का सबसे ऊँचाई में स्थित डाकघर देखकर तो अलग सी ख़ुशी हुई। डाकघर वैसे ही जनाए कितने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करते हैं और उस पर शायद वहाँ जाकर सभी अपने घर एक ख़त रवाना कर ही देते होंगे। इस किताब में स्पिती से जुड़ी हर बात को बख़ूबी बयान करती है। इस किताब को पढ़ते हुए सहज ही स्पिती जाने का मन हो आया।

अगर किसी काल्पनिक किताब को पढ़ते हुए आपका मन उस कहानी में जीने लगे और हर दृश्य को महसूस करने लगे तो मानिए कि लिखने वाले ने शब्दों ओ जीवंत कर दिया है। उसी तरह जब आप यात्रा वृतांत को पढ़ते हुए उस जगह जाने के बारे में सोचने लगते हैं तो लिखने वाले ने यात्रा का आनंद आप तक पहुँचा दिया है और इस किताब में तो तस्वीरें भी हैं जो आपको स्पिती जाने के लिए ललचा देती हैं।
(किताब से जुड़ी कुछ तस्वीरें आप तक जानकारी पहुँचाने के लिए लगायी जा रही हैं..इन तस्वीरों पर पूरा अधिकार लेखक का ही है) Spiti Review
आदरणीया नेहा शर्मा जी
नमस्कार
मेरा अभिवादन स्वीकार करें।
मेरा नाम मुकुल रंजन है। मैं मनोरंजन उद्योग में पटकथा लेखक तथा निर्देशक का काम करता हूँ। कुछ समय पहले मेरा दूसरा उपन्यास – हर शाख़ पर उल्लू बैठा है प्रकाशित हुआ है। इससे पहले २०२१ में पहला उपन्यास – कोल्ड कॉक (Cold Cock) प्रकाशित हुआ था।
मेरा मोबाइल/व्हॉट्सएप नंबर – 9892479152 तथा ईमेल आइ डी – mukul67ranjan@gmail.com है।
मैं आपसे जानना चाह रहा था कि क्या साहित्य दुनिया में मेरे उपन्यास की समीक्षा संभव हो सकती है? अगर हॉं तो इसकी क्या प्रक्रिया है? और क्या यह सुविधा निशुल्क है?
इसी मेल के ठीक नीचे उपन्यास सारांश तथा लेखक परिचय दिया गया है।
धन्यवाद सहित
सादर,
मुकुल रंजन
उपन्यास सार
वैश्विक मंदी के साये में बुलु और रमज़ान मिलकर एक कंपनी शुरु करते हैं।
इनके इरादे नेक हैं पर तेवर, लहज़ा, रौ और रविश सब वारफ़्ता हैं।
बुलु मित्रा, रमज़ान हलालख़ोर और इनके दोस्त, दरअसल प्रतीक हैं उपभोक्तावाद की उस संस्कृति के जिसमें कमाई का अर्थ ही ऐश करना है।
इनका पूरा विश्वास है कि पैसे आते ही हैं सिर्फ़ उड़ाने के लिए।
इनकी कंपनी के कर्मचारी इनके लिए महज़ कोल्हू के बैल हैं।
और, बुलु और रमज़ान के लिए अपने पैरों पर ख़ुद ही कुल्हाड़ी चलाना एक ज़बरदस्त मनोरंजक खेल है।
लेखक परिचय
मुकुल रंजन बतौर लेखक – निर्देशक क़रीबन तीन दशक से मुम्बई के मनोरंजन उद्योग से जुड़े हुए हैं।
मुकुल ने चकरघिन्नी, महाचक्रवात (Super Cyclone), रजनी, कलिंग कथा, आज का छत्तीसगढ़, महायात्रा, द लिट्ल जीनियस (The Little Genius), बीपीएल सुपरस्टार्स (BPL Superstars) जैसी फिल्मों तथा टी वी शो का पटकथा लेखन अथवा निर्देशन किया है।
मुकुल कई वर्षों तक स्टार स्पोर्ट्स (Star Sports) टी वी चैनल के इन – हाउस स्क्रिप्ट राइटर रह चुके हैं।
२०२१ में अंग्रेज़ी भाषा में मुकुल का पहला उपन्यास, कोल्ड कॉक (Cold Cock) प्रकाशित हुआ था।
हर शाख़ पर उल्लू बैठा है, मुकुल रंजन का दूसरा और हिन्दी भाषा में पहला उपन्यास है।