अख़बार शायरी

Akhbaar Shayari

Akhbaar Shayari ~~ अख़बार में रोज़ाना वही शोर है यानी अपने से ये हालात सँवर क्यूँ नहीं जाते महबूब ख़िज़ां (Mahboob KhizaaN) ~~~~~~ सुर्ख़ियाँ ख़ून में डूबी हैं सब अख़बारों की आज के दिन कोई अख़बार न देखा जाए मख़मूर सईदी (Makhmoor Saeedi) ~~~~~ अर्से से इस दयार की कोई ख़बर नहीं मोहलत मिले तो … Read more