Filmi Ghazal

शहरयार की फ़िल्मों में आयी ग़ज़लें…

जब भी मिलती है मुझे अजनबी लगती क्यूँ है ज़िंदगी रोज़ नए रंग बदलती क्यूँ है धूप के क़हर का...