अलफ़ाज़ की बातें (14): हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें “हालातों”, “जज़्बातों” या “अल्फ़ाज़ों” का इस्तेमाल होता है जबकि ये पूरी तरह से ग़लत है. हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे कारण क्या है. अस्ल में “हाल” शब्द का अर्थ होता है “अवस्था” या “स्थिति” (condition). इस शब्द का जम’अ या’नी बहुवचन (plural) है “हालात”. कहने का मतलब है कि “हालात” अपने आप में एक plural है, इसलिए इसका कोई और plural नहीं बन सकता. यही वजह है कि “हालातों” ग़लत है.

इसी तरह से ‘जज़्बा'(अर्थ- भावना) का plural है ‘जज़्बात’ और ‘लफ़्ज़'(अर्थ- शब्द) का plural है ‘अलफ़ाज़’. ‘हालात’ वाली ही बात यहाँ भी है, इसलिए “जज़्बातों” और “अल्फ़ाज़ों” भी ग़लत है.

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