अलफ़ाज़ की बातें (2): ‘ग़म’, बोलने का तरीक़ा, कुछ बातें और इससे जुड़े शब्द…

ग़म (غم): ग़म शब्द मूल रूप से फ़ारसी भाषा से लिया गया है. इसका अर्थ है दुःख, शोक, क्षोब, इत्यादि. उर्दू में इसे ग़ैन (غ) और मीम (م) को मिला कर लिखा जाता है. हिंदी में ग़ैन (غ) के लिए “ग़” और मीम (م) के लिए “म” का प्रयोग किया जाता है और इस प्रकार इसे “ग़म” लिखा जाता है. ध्यान रहे इसमें ग के नीचे बिंदी (नुक़ता) लगी हुआ है और इसलिए इसका उच्चारण करते समय विशेष ध्यान रहे. अगर ग के नीचे बिंदी ना होती और ये ‘गम’ लिखा होता तो उर्दू ज़बान में इसे लिखने के लिए ग़ैन (غ) और मीम (م) का नहीं बल्कि गाफ़ (گ) और मीम (م) का इस्तेमाल होता. ग़म से बने कुछ अलफ़ाज़..

ग़मआलूद- ग़म से भरा हुआ
ग़मकदा- ग़म का घर
ग़मख़ाना- ग़मकदा की तरह इसका अर्थ भी ग़म का घर होता है
ग़मकश- ग़म सहने वाला
ग़मख़ोर- ग़म खाने वाला
ग़मख़्वार- हमदर्द
ग़मख़्वारी- हमदर्दी
ग़मगुसार- हमदर्द (ग़मख़्वार और ग़मगुसार के मा’नी एक ही होते हैं)
ग़मगुसारी- हमदर्दी (ग़मख़्वारी और ग़मगुसारी के मा’नी एक ही होते हैं)
ग़मदीदा – ग़मगीन, दुःख से भरा हुआ 

ग़मनाक- ग़म से भरा हुआ
ग़मरसीदा- जिसे दुःख पहुँचा हो,जिसे ग़म मिला हो
ग़मदोस्त- जो ग़म का दोस्त हो (जिसे ग़म में रहना पसंद हो, ऐसे लोगों को निराशावादी भी कहा जाता है)
ग़म ए दिल- दिल का ग़म
ग़म ए दौराँ- दौर का ग़म (दुनिया का ग़म)
ग़म ए पिन्हाँ- पिन्हाँ का ग़म (इश्क़ का ग़म)
ग़म ए रोज़गार- रोज़गार ना होने का ग़म, या रोज़गार से असंतुष्टि होने पर ग़म
ग़मी- ग़म से सम्बंधित, किसी की मौत हो जाने पर भी कहा जाता है,”ग़मी हो गयी”

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