wo humsafar tha वो हम-सफ़र था मगर उससे हम-नवाई न थी Urdu ke Mushkil Lafz Akhtar Ul Iman Shayari Majaz Shayari Famous Barish Shayari Barsaat Shayari Baarish Shayari Hindi Kahani Arghwan Rabbhi Urdu Lafz Aghori Ka Moh Acaharya Ram Chandra Shukl Ki Kahani Gyaarah Varsh Ka Samay

Urdu Lafz :  हर ज़बान में कुछ ऐसे लफ़्ज़ होते हैं जो बोलने में लगभग एक से सुनाई देते हैं लेकिन मा’नी में अलग होते हैं. हालाँकि ये लफ़्ज़ बोलने में भी अलग ही होते हैं लेकिन सुनते वक़्त कोई कम ध्यान लगाए तो एक से लग जाएँ.ऐसे ही लफ़्ज़ों के दो जोड़े हम आज अपनी बातचीत में शामिल कर रहे हैं.

ख़ू – आदत (habit)
ख़ूं – ख़ून (blood)

मिर्ज़ा ग़ालिब के इस शे’र में “ख़ू” का इस्तेमाल किया गया है. देखें,
“हम भी तस्लीम की ख़ू डालेंगे,
बे-नियाज़ी तिरी आदत ही सही”

हबीब अहमद सिद्दीक़ी का ये शे’र देखें, इसमें उन्होंने “ख़ूं” लफ़्ज़ का इस्तेमाल किया है.
“हज़ारों तमन्नाओं के ख़ूं से हमने,
ख़रीदी है इक तोहमत-ए-पारसाई”


मै (मय) – शराब (alcohol)
मैं – मैं (I//me)

हफ़ीज़ जालंधरी के शे’र में “मै’ शब्द का इस्तेमाल देखिये..
इन तल्ख़ आँसुओं को न यूँ मुँह बना के पी,
ये मै है ख़ुद-कशीद इसे मुस्कुरा के पी

अहमद फ़राज़ के शे’र में “मैं” का इस्तेमाल देखिये… Urdu Lafz

मैं कि सहरा-ए-मुहब्बत का मुसाफ़िर था ‘फ़राज़’,
एक झोंका था कि ख़ुश्बू के सफ़र पर निकला

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