साहित्य दुनिया

घनी कहानी, छोटी शाखा: आचार्य चतुरसेन की कहानी ‘न मालूम सी एक ख़ता’ का पहला भाग

Acharya Chatursen Ki Kahani न मालूम सी एक ख़ता- आचार्य चतुरसेन भाग-1 Acharya Chatursen Ki Kahani:  गर्मी के दिन थे।...

दो शाइर, दो नज़्में(13): मजीद अमजद और अख़्तर-उल-ईमान

Majid Amjad Hindi Shayari मजीद अमजद की नज़्म "मंटो" मैंने उस को देखा है उजली उजली सड़कों पर इक गर्द भरी...

घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का अंतिम भाग

15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब...

दो शाइर, दो ग़ज़लें (23): राजेन्द्र मनचंदा बानी और अहमद फ़राज़

(अहमद फ़राज़ मनचंदा बानी) राजेन्द्र मनचंदा "बानी" की ग़ज़ल ऐ दोस्त मैं ख़ामोश किसी डर से नहीं था क़ाइल ही...

घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का पाँचवा भाग

15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब...

घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का चौथा भाग

15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब...

घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का तीसरा भाग

15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब...

घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का दूसरा भाग

15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब...

घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का पहला भाग

श्रीचरणकमलेषु, आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे...

मैक्सिम गोर्की की कहानी ‘कोलुशा’ का अंतिम भाग

Maxim Gorky Hindi Kolusha अब तक आपने पढ़ा- एक क़ब्र के पास बैठी औरत को देख कर लेखक के मन...