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Relation Shayari

Relation Shayari

न बहलावा न समझौता जुदाई सी जुदाई है
‘अदा’ सोचो तो ख़ुशबू का सफ़र आसाँ नहीं होता

अदा जाफ़री
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तेरी समझौते-बाज़ दुनिया में
कौन मेरे सिवा अकेला था

वसीम बरेलवी

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सोशल मीडिया और Instagram रील के लिए बेहतरीन शायरी का संकलन…

ज़िंदगी अब तो यही शक्ल है समझौते की
दूर हट जाऊँ तिरी राह से रस्ता दे दूँ

अली अहमद जलीली
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हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में

बशीर बद्र

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ज़िंदगी तुझसे हर इक साँस पे समझौता करूँ
शौक़ जीने का है मुझको मगर इतना भी नहीं

मुज़फ़्फ़र वारसी

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मेराज फ़ैज़ाबादी के बेहतरीन शेर…

खिलौनों की दुकानों की तरफ़ से आप क्यूँ गुज़रे
ये बच्चे की तमन्ना है ये समझौता नहीं करती

मुनव्वर राना
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ज़िंदगी से किसी समझौते के बा-वस्फ़ अब तक
याद आता है कोई मारने मरने वाला

परवीन शाकिर
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तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़’
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला

अहमद फ़राज़
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जो चाहती दुनिया है वो मुझ से नहीं होगा
समझौता कोई ख़्वाब के बदले नहीं होगा

शहरयार

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वक़्त के साथ ‘सदा’ बदले तअल्लुक़ कितने
तब गले मिलते थे अब हाथ मिलाया न गया

सदा अम्बालवी

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शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं
इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं

वसीम बरेलवी
परवीन शाकिर के बेहतरीन शेर…
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हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

साहिर लुधियानवी
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कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो

बशीर बद्र

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बा’द रंजिश के गले मिलते हुए रुकता है दिल
अब मुनासिब है यही कुछ मैं बढ़ूँ कुछ तू बढ़े

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

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