July 2, 2026

Month: October 2025

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है – परवीन शाकिर की ग़ज़ल

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है मुझ पे एहसान हवा करती है चूम कर फूल को आहिस्ता से मो’जिज़ा बाद-ए-सबा...

तीसरी क़सम – फणीश्वरनाथ रेणु

Teesri Qasam Renu हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी।...

कोलुशा – मैक्सिम गोर्की

मैक्सिम गोर्की की कहानी - कोलुशा क़ब्रिस्तान का वह कोना, जहाँ भिखारी दफ़नाये जाते हैं। पत्तों से छितरे, बारिश से...

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ – शकील बदायूँनी

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे...

वो हँसती है तो उसके हाथ रोते हैं – अब्बास ताबिश

किसी के ब'अद अपने हाथों की बद-सूरती में खो गई है वो मुझे कहती है 'ताबिश'! तुमने देखा मेरे हाथों...

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है – मोहसिन नक़वी

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है तो देर तक मिरे घर का सुकूत बोलता है हम ऐसे ख़ाक-नशीं...

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है – मिर्ज़ा ग़ालिब

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो'ले...