आईना ~ परवीन शाकिर
परवीन शाकिर की नज़्म - आईना लड़की सर को झुकाए बैठी कॉफ़ी के प्याले में चमचा हिला रही है लड़का...
परवीन शाकिर की नज़्म - आईना लड़की सर को झुकाए बैठी कॉफ़ी के प्याले में चमचा हिला रही है लड़का...
उसने कहा था - चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की ज़बान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल...
Bhikharin Rabindranath Tagore - अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह...
अपने बिस्तर पे बहुत देर से मैं नीम-दराज़ सोचती थी कि वो इस वक़्त कहाँ पर होगा मैं यहाँ हूँ...
‘यूँ गुज़री है अब तलक’ सीमा कपूर की आत्मकथा है, जिसमें लेखिका ने अपने जीवन के संघर्ष, रिश्तों, प्रेम, काम...
आ कि वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझसे जिसने इस दिल को परी-ख़ाना बना रक्खा था जिसकी उल्फ़त में...
Justju jiski thi usko to na paaya humne जुस्तुजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने इस बहाने से मगर...
Agyeya Ki Kahani Roz लेखक - अज्ञेय ___________ दोपहरिए में उस घर के सूने आँगन में पैर रखते ही मुझे...
Ret Par Safar Ka Lamha रेत पर सफ़र का लम्हा - अहमद शमीम कभी हम ख़ूब-सूरत थे किताबों में बसी...
ग़ज़ल क्या है? मुसल्लस जब कोई कविता तीन-तीन मिसरों के बंदों में बँटी होती है, तो उसे मुसल्लस कहा जाता...