घनी कहानी,छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी “वापसी” का अंतिम भाग

Usha Priyamvada ki Kahaani Waapsi

Usha Priyamvada ki Kahaani Waapsi : वापसी (उषा प्रियम्वदा) घनी कहानी, छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी ‘वापसी’ का पहला भाग.. घनी कहानी,छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी “वापसी” का दूसरा भाग घनी कहानी,छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी “वापसी” का तीसरा भाग भाग-4 (अब तक आपने पढ़ा..अपनी नौकरी के कारण वर्षों घर-परिवार से दूर … Read more

घनी कहानी,छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी “वापसी” का तीसरा भाग

Usha Priyamvada Kahaani Waapsi

Usha Priyamvada Kahaani Waapsi वापसी (उषा प्रियम्वदा) घनी कहानी, छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी ‘वापसी’ का पहला भाग.. घनी कहानी,छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी “वापसी” का दूसरा भाग भाग-3 (अब तक आपने पढ़ा..रिटायरमेंट के बाद अपने परिवार के साथ रहने पहुँचे गजाधर बाबू को परिवार में अपनी वो जगह नहीं मिलती, जिसकी वो … Read more

घनी कहानी,छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी “वापसी” का दूसरा भाग

Usha Priyamvada Kahani Waapsi

Usha Priyamvada Kahani Waapsi वापसी (उषा प्रियम्वदा) घनी कहानी, छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी ‘वापसी’ का पहला भाग.. भाग-2 (अब तक आपने पढ़ा..अपनी रेलवे की नौकरी के कारण वर्षों परिवार से दूर अकेले रहते गजाधर बाबू, रिटायरमेंट के बाद परिवार के साथ ख़ुशनुमा वक़्त बिताने के सपने लिए घर पहुँचते हैं। लेकिन परिवार से सालों … Read more

घनी कहानी, छोटी शाखा: उषा प्रियम्वदा की कहानी ‘वापसी’ का पहला भाग..

Usha Priyamvada Kahani Wapsi

Usha Priyamvada Kahani Wapsi वापसी (उषा प्रियम्वदा) भाग-1 गजाधर बाबू ने कमरे में जमा सामान पर एक नज़र दौड़ाई – दो बक्‍से, डोलची, बालटी – “यह डिब्बा कैसा है, गनेशी?” उन्होंने पूछा। गनेशी बिस्तर बाँधता हुआ, कुछ गर्व, कुछ दुःख, कुछ लज्जा से बोला, “घरवाली ने साथ को कुछ बेसन के लड्डू रख दिए हैं। कहा, … Read more

मजाज़ की ग़ज़लें

Manchanda Bani Majaz Shayari Majaz Ki Shayari

Majaz Ki Shayari ~ असरार उल हक़ ‘मज़ाज’ की कुछ ग़ज़लें यहाँ हम पेश कर रहे हैं। मुलाहिज़ा फ़रमाएँ – दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता-ए-जफ़ा पे कहीं अब करम भी गराँ न हो जाए तेरे बीमार का ख़ुदा-हाफ़िज़ नज़्र-ए-चारा-गराँ न हो जाए इश्क़ क्या क्या न आफ़तें ढाए हुस्न गर मेहरबाँ न हो जाए मय के आगे ग़मों का … Read more

घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का अंतिम भाग..

Shayari Mein Wazn Premchand Ki Kahani Eidgah Munshi Premchand Ki Eidgah Premchand Eidgaah Eidgah Kahani Hindi Ki Pahli Kahani

ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद) Eidgah Kahani घनी कहानी, छोटी शाखा(1): मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का पहला भाग.. घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का दूसरा भाग.. घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का तीसरा भाग.. घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का चौथा भाग.. भाग-पाँच (अब तक आपने पढ़ा। गाँव … Read more

घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का चौथा भाग..

Shayari Mein Wazn Premchand Ki Kahani Eidgah Munshi Premchand Ki Eidgah Premchand Eidgaah Eidgah Kahani Hindi Ki Pahli Kahani

ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद) Premchand Ki Kahani Eidgah भाग -चार घनी कहानी, छोटी शाखा(1): मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का पहला भाग.. घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का दूसरा भाग.. घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का तीसरा भाग.. (अब तक आपने पढ़ा..हामिद अपने दोस्तों और कुछ बड़ों के साथ अपनी दादी … Read more

दो शाइर, दो नज़्में(7): परवीन शाकिर और फ़हमीदा रियाज़

Meer Ki Shayari Parveen Shakir Fehmida Riyaz हिन्दी व्याकरण उ और ऊ ज़ वाले शब्द Khaleel Jibran Kahani In Hindi Bhikharin Kahani Madhavrao Sapre Ki Ek Tokri Bhar Mitti Bang Mahila Rajendra Bala Ghosh Ki Kahani Dulaiwali

Parveen Shakir Fehmida Riyaz _________________________________ परवीन शाकिर की नज़्म: नहीं मेरा आँचल मैला है नहीं मेरा आँचल मैला है और तेरी दस्तार के सारे पेच अभी तक तीखे हैं किसी हवा ने इनको अब तक छूने की जुरअत नहीं की है तेरी उजली पेशानी पर गए दिनों की कोई घड़ी पछतावा बन के नहीं फूटी … Read more

घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का तीसरा भाग..

Shayari Mein Wazn Premchand Ki Kahani Eidgah Munshi Premchand Ki Eidgah Premchand Eidgaah Eidgah Kahani Hindi Ki Pahli Kahani

ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद) Premchand Eidgaah भाग -तीन घनी कहानी, छोटी शाखा(1): मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का पहला भाग.. घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का दूसरा भाग.. (इससे पहले आपने पढ़ा हामिद, जो अपनी दादी अमीना के साथ गाँव में रहता है, ईद के मौक़े पर सिर्फ़ तीन पैसे साथ लिए अपने दोस्तों … Read more

घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का दूसरा भाग..

Shayari Mein Wazn Premchand Ki Kahani Eidgah Munshi Premchand Ki Eidgah Premchand Eidgaah Eidgah Kahani Hindi Ki Pahli Kahani

ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद) Munshi Premchand Ki Eidgah घनी कहानी, छोटी शाखा(1): मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ का पहला भाग.. भाग -दो (पहले भाग में आपने पढ़ा, चार-पाँच साल का बिन माँ-बाप का बच्चा हामिद अपनी दादी अमीना के साथ गाँव में रहता है। अपने माँ-बाप की मौत से अनजान हामिद पिता के जल्द रुपये कमाकर लौटने … Read more