Rajendra Sinha Hindi Divas Rajendra Sinha

हम में से अधिकतर लोग ये जानते हैं कि आज या’नी १४ सितम्बर को ‘हिन्दी दिवस’  मनाया जाता है. इसका कारण ये है कि भारत ने आज ही की तारीख़ में सन १९४९ में हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. परन्तु हम में से अधिकतर लोगों को इस बारे में शायद ही पता हो कि इस दिन को चुनने के पीछे भी एक कारण है. आज़ादी हासिल करने के बाद जब भारत में सरकार की स्थापना हुई तो भाषा से लेकर हर अहम बात पर निर्णय लिए जाने लगे. Rajendra Sinha Hindi Divas

पंडित जवाहर लाल नेहरु के नेतृत्व में बनी सरकार ने तब ये फ़ैसला किया कि देश में कई भाषाओं के प्रचलित होने के बाद भी हिन्दी को ही राजभाषा बनाया जाना चाहिए. इसके पीछे कई हिन्दी साहित्यकारों ने संघर्ष किया. इन साहित्यकारों ने देश भर का दौरा किया और दक्षिण के राज्यों में भी लोगों से मिलकर उन्हें ये समझाने की कोशिश की कि हिन्दी को राजभाषा क्यूँ बनाया जाए. इस पर कई मत उभर कर आए परन्तु अंत में हिन्दी को अंग्रेज़ी भाषा के साथ राजभाषा का दर्जा दिया गया.

बात मगर ये आती है कि आख़िर इसी तारीख़ को सरकार ने क्यूँ चुना तो इसके पीछे कारण ये है कि १४ सितम्बर १९४९ व्यौहार राजेन्द्र सिन्हा का पचासवाँ जन्मदिन था. वरिष्ठ साहित्यकार और हिन्दी-कार्यकर्ता व्यौहार राजेन्द्र सिन्हा को संस्कृत, बांग्ला, मराठी, उर्दू, गुजराती, मलयालम और अंग्रेज़ी का भी ज्ञान था. परन्तु उनका प्रेम हिन्दी भाषा से अधिक था. इस बारे में विकिपीडिया में लिखा है,”स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, सेठ गोविन्ददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिन्हा ने अथक प्रयास किए। इसके चलते उन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएं भी कीं और लोगों को मनाया।”

१४ सितम्बर का दिन बाद में दुनिया भर के हिन्दी प्रेमी ‘हिन्दी-दिवस’ के रूप में मनाने लगे. इसका ये अर्थ हुआ कि साहित्यकार व्यौहार राजेन्द्र सिन्हा का जन्म-दिवस (Rajendra Sinha Hindi Divas) आज हम सभी ‘हिन्दी-दिवस’ के रूप में मनाते हैं. इस विशेष जानकारी के साथ ‘साहित्य दुनिया’ की ओर से आप सभी को ‘हिन्दी-दिवस’ की बधाई.

One thought on “इस साहित्यकार के जन्मदिन को ‘हिन्दी-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है….”

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