अरग़वान रब्बही के शेर…
Arghwan Rabbhi Shayari है इक तमीज़ कि बाहर निकल नहीं सकता, तुम्हारा हाथ पकड़ कर मैं चल नहीं सकता अरग़वान...
Arghwan Rabbhi Shayari है इक तमीज़ कि बाहर निकल नहीं सकता, तुम्हारा हाथ पकड़ कर मैं चल नहीं सकता अरग़वान...
Bewafai Shayari काम आ सकीं न अपनी वफ़ाएँ तो क्या करें उस बेवफ़ा को भूल न जाएँ तो क्या करें...
तहज़ीब हाफ़ी समकालीन उर्दू शायरी के उन शायरों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी सादा, दिलकश और आधुनिक अंदाज़-ए-बयाँ से ख़ास...