भिखारिन – रबीन्द्रनाथ टैगोर

Bhikharin Rabindranath Tagore – अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती और नम्रता से कहती- “बाबूजी, अन्धी पर दया हो जाए” वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रध्दालु हुआ करते हैं। उसका यह अनुमान असत्य न था। आने-जाने … Read more

दो कहानीकार, दो कहानियाँ (1): प्रेमचंद और टैगोर

Tagore Premchand Kahani

Tagore Premchand Kahani साहित्य दुनिया में हम अभी तक शा’इरी को लेकर ही ज़्यादा बातें कर रहे थे लेकिन हम अब कहानियों पर भी चर्चा शुरू करने जा रहे हैं. ऐसे में हम आज आपके सामने दो विश्विख्यात लेखकों की कहानियाँ पेश कर रहे हैं, रबीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी “काबुलीवाला” और प्रेमचंद की “बाबाजी का … Read more