फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की शायरी
Faiz Ahmed Faiz Shayari 1. दोनों जहान तेरी मुहब्बत में हार के, वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के...
Faiz Ahmed Faiz Shayari 1. दोनों जहान तेरी मुहब्बत में हार के, वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के...
इब्ने निशाती की मसनवी "फूलबन" (Ibn e Nishati Phoolban) दकनी भाषा में एक प्रेम काव्य है। फ़िराक़ गोरखपुरी इस मसनवी...
Keyphrase- Baazeecha E Atfal Ghalib बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे इक खेल है औरंग-ए-सुलैमाँ...