University Shayari

तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद
कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद

तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुःख
तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद

फ़रहत अब्बास शाह

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