साहित्य दुनिया

‘उ’ और ‘ऊ’ वाले शब्द

उ और ऊ वाले शब्द :पढ़ने का तरीक़ा: शब्द (वज़्न) सभी अर्थ उक़ूबत (122) दण्ड, सज़ा उजाड़ (121) बंजर, विरान,...

दो शाइर, दो नज़्में(11): हबीब जालिब और नून मीम राशिद

Habib Jalib Shayari Hindi हबीब जालिब की नज़्म- औरत बाज़ार है वो अब तक जिस में तुझे नचवाया दीवार है वो...

घनी कहानी, छोटी शाखा: जयशंकर प्रसाद की कहानी “ग़ुंडा” का अंतिम भाग

गुंडा- जयशंकर प्रसाद Hindi Kahani Gunda घनी कहानी, छोटी शाखा: जयशंकर प्रसाद की कहानी “ग़ुंडा” का पहलाभाग घनी कहानी, छोटी...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (20): दुष्यंत कुमार और मजाज़

Dushyant Kumar Shayari दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल: ये जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो ये जो शहतीर है...

घनी कहानी, छोटी शाखा: शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की कहानी “अनुपमा का प्रेम” का अंतिम भाग

अनुपमा का प्रेम- शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय   Anupama ka prem Sharatchandr घनी कहानी, छोटी शाखा: शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की कहानी “अनुपमा का...

घनी कहानी, छोटी शाखा: शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की कहानी “अनुपमा का प्रेम” का दूसरा भाग

अनुपमा का प्रेम- शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय Anupama ka prem घनी कहानी, छोटी शाखा: शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की कहानी “अनुपमा का प्रेम” का...

घनी कहानी, छोटी शाखा: सआदत हसन मंटो की कहानी “खोल दो” का अंतिम भाग

Manto Ki Kahani Khol Do खोल दो-सआदत हसन मंटो  भाग-2  (अब तक आपने पढ़ा..जब स्पेशल ट्रेन अमृतसर से मुग़लपुरा पहुँचते...

घनी कहानी, छोटी शाखा: गोपालराम गहमरी की कहानी “गुप्तकथा” का तीसरा भाग

गुप्तकथा- गोपालराम गहमरी  Guptkatha घनी कहानी, छोटी शाखा: गोपालराम गहमरी की कहानी “गुप्तकथा” का पहला भाग घनी कहानी, छोटी शाखा: गोपालराम...

घनी कहानी, छोटी शाखा: चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी कहानी “सुखमय जीवन” का पहला भाग

Chandrdhar Sharma Guleri Ki Kahani Sukhmay Jivan ~ (हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप "घनी कहानी छोटी शाखा" में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..आज से पेश है “चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'" की लिखी कहानी “सुखमय जीवन" ..आज पढ़िए पहला भाग) सुखमय...

दो शाइर, दो नज़्में(10): कैफ़ी आज़मी और मुनीर नियाज़ी

Kaifi Azmi Shayari Hindi कैफ़ी आज़मी की नज़्म- दाएरा रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे, फिर वहीं लौट के आ जाता...