मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है – सलीम कौसर

सलीम कौसर

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ मैं नसीब हूँ किसी और का मुझे माँगता कोई और है अजब ए’तिबार ओ बे-ए’तिबारी के दरमियान है ज़िंदगी मैं क़रीब हूँ किसी और … Read more

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम – मोमिन ख़ाँ मोमिन

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम पर क्या करें कि हो गए नाचार जी से हम हँसते जो देखते हैं किसी को किसी से हम मुँह देख देख रोते हैं किस बे-कसी से हम हम से न बोलो तुम इसे क्या कहते हैं भला इंसाफ़ कीजे पूछते हैं आप ही से … Read more

अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से – परवीन शाकिर

Parveen Shakir Best Sher

अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से ज़मीं की ख़ैर माँगें आसमाँ से अगर चाहें तो वो दीवार कर दें हमें अब कुछ नहीं कहना ज़बाँ से सितारा ही नहीं जब साथ देता तो कश्ती काम ले क्या बादबाँ से भटकने से मिले फ़ुर्सत तो पूछें पता मंज़िल का मीर-ए-कारवाँ से तवज्जोह बर्क़ की हासिल रही … Read more

दिल धड़कने का सबब याद आया – नासिर काज़मी

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त तू मुसीबत में अजब याद आया दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से फिर तिरा वादा-ए-शब याद आया तेरा भूला हुआ पैमान-ए-वफ़ा मर रहेंगे अगर अब याद आया फिर कई लोग नज़र से गुज़रे फिर कोई शहर-ए-तरब … Read more

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है – परवीन शाकिर की ग़ज़ल

Parveen Shakir Best Sher

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है मुझ पे एहसान हवा करती है चूम कर फूल को आहिस्ता से मो’जिज़ा बाद-ए-सबा करती है खोल कर बंद-ए-क़बा गुल के हवा आज ख़ुश्बू को रिहा करती है अब्र बरसे तो इनायत उस की शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है ज़िंदगी फिर से फ़ज़ा में रौशन मिशअल-ए-बर्ग-ए-हिना करती है … Read more

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ – शकील बदायूँनी

Aaj Phir Gardish e Taqdeer Pe Rona Aaya - Shakeel Budanyuni Shakeel Badayuni Shayari

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे हसरत-ए-ग़म है जो भर के छलक जाए वो पैमाना नहीं हूँ रूदाद-ए-ग़म-ए-इश्क़ है ताज़ा मिरे दम से उनवान-ए-हर-अफ़्साना हूँ अफ़्साना नहीं हूँ इल्ज़ाम-ए-जुनूँ दें न मुझे अहल-ए-मोहब्बत मैं ख़ुद ये समझता हूँ कि दीवाना नहीं … Read more

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है – मोहसिन नक़वी

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है तो देर तक मिरे घर का सुकूत बोलता है हम ऐसे ख़ाक-नशीं क्या लुभा सकेंगे उसे वो अपना ‘अक्स भी मीज़ान-ए-ज़र में तोलता है जो हो सके तो यही रात ओढ़ ले तन पर बुझा चराग़ अँधेरे में क्यों टटोलता है उसी से माँग लो ख़ैरात अपने … Read more

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है – मिर्ज़ा ग़ालिब

Ghalib Ke Baare Mein Parag Agrawal Ghalib Aur Zauq ki Ghazalen Baazeecha E Atfal Ghalib Aaina Kyun Na Doon Aah Ko Chahiye Ik

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो’ले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा कोई बताओ कि वो शोख़-ए-तुंद-ख़ू क्या है ये रश्क है कि वो होता है हम-सुख़न तुम से वगर्ना ख़ौफ़-ए-बद-आमोज़ी-ए-अदू क्या है चिपक रहा है बदन पर लहू … Read more

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए – परवीन शाकिर

Parveen Shakir Best Sher

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए मौसम के हाथ भीग के सफ़्फ़ाक हो गए बादल को क्या ख़बर है कि बारिश की चाह में कैसे बुलंद-ओ-बाला शजर ख़ाक हो गए जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए लहरा रही है बर्फ़ की चादर … Read more

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं – अब्बास ताबिश

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं दुनिया भी गई इश्क़ में तुझ से भी गया मैं इक सोच में गुम हूँ तिरी दीवार से लग कर मंज़िल पे पहुँच कर भी ठिकाने न लगा मैं वर्ना कोई कब गालियाँ देता है किसी को ये उस का करम है कि तुझे याद रहा … Read more