ग़ज़ल

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है – परवीन शाकिर की ग़ज़ल

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है मुझ पे एहसान हवा करती है चूम कर फूल को आहिस्ता से मो’जिज़ा बाद-ए-सबा...

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ – शकील बदायूँनी

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे...

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है – मोहसिन नक़वी

हवा का लम्स जो अपने किवाड़ खोलता है तो देर तक मिरे घर का सुकूत बोलता है हम ऐसे ख़ाक-नशीं...

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है – मिर्ज़ा ग़ालिब

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है न शो'ले...

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए – परवीन शाकिर

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए मौसम के हाथ भीग के सफ़्फ़ाक हो गए बादल को क्या...

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं – अब्बास ताबिश

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं दुनिया भी गई इश्क़ में तुझ से भी गया मैं इक...

फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है – अजमल सिराज

फ़ाएदा क्या है हमें और ख़सारा क्या है जो भी है आप का सब कुछ है हमारा क्या है हम...

कहाँ हो तुम चले आओ मुहब्बत का तक़ाज़ा है – बहज़ाद लखनवी

कहाँ हो तुम चले आओ मुहब्बत का तक़ाज़ा है ग़म-ए-दुनिया से घबरा कर तुम्हें दिल ने पुकारा है तुम्हारी बे-रुख़ी...

कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ – अहमद फ़राज़

सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते वर्ना इतने तो मरासिम थे कि आते जाते शिकवा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से तो कहीं बेहतर...

क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो

क्या कहेगा कभी मिलने भी अगर आएगा वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगा वो हम समझते थे कि...