वज़ीर आग़ा की ग़ज़ल: “ऐसे गए कि फिर न कभी लौटना हुआ…”
wazeer aagha ghazal : बादल छटे तो रात का हर ज़ख़्म वा हुआ आँसू रुके तो आँख में महशर बपा…
हिन्दी और उर्दू साहित्य का संगम
wazeer aagha ghazal : बादल छटे तो रात का हर ज़ख़्म वा हुआ आँसू रुके तो आँख में महशर बपा…
Abdul Hamid Adam Shayari हंस के बोला करो बुलाया करो, आपका घर है आया जाया करो हद से बढ़कर हसीन…
Noshi Gilani Shayari तुझसे अब और मुहब्बत नहीं की जा सकती, ख़ुद को इतनी भी अज़ीयत नहीं दी जा सकती…