ग़ज़ल

दो शा’इर, दो ग़ज़लें(3): मुनीर नियाज़ी और गुलज़ार…

Munir Niazi Gulzar Ghazal ~ "साहित्य दुनिया" केटेगरी के अंतर्गत "दो शा'इर, दो ग़ज़लें" सिरीज़ में हम आज जिन दो...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें(2): मनचंदा बानी और मजाज़…

Manchanda Bani Majaz Shayari ~ आज हम जिन दो शा'इरों की ग़ज़लें आपके सामने पेश कर रहे हैं उनके नाम...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें(1): जिगर मुरादाबादी और साहिर लुधियानवी….

आज से हमने "साहित्य दुनिया" पर एक नयी सीरीज़ शुरू करने की सोची है. हम अब लगातार अपने पाठकों के...

वज़ीर आग़ा की ग़ज़ल: “ऐसे गए कि फिर न कभी लौटना हुआ…”

wazeer aagha ghazal : बादल छटे तो रात का हर ज़ख़्म वा हुआ आँसू रुके तो आँख में महशर बपा...

तुझसे अब और मुहब्बत नहीं की जा सकती

Noshi Gilani Shayari तुझसे अब और मुहब्बत नहीं की जा सकती, ख़ुद को इतनी भी अज़ीयत नहीं दी जा सकती...