ग़ज़ल

मजाज़ की ग़ज़ल: “जिगर और दिल को बचाना भी है”

Jigar aur dil ko bachana जिगर और दिल को बचाना भी है, नज़र आप ही से मिलाना भी है मुहब्बत...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें सीरीज़ (12): फ़ानी बदायूँनी और राहत इन्दौरी

फ़ानी बदायूँनी की ग़ज़ल: हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते Hum Maut Bhi Aaye to Masroor Nahin Hote...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें सीरीज़ (11): फै़ज़ अहमद फै़ज़ और असग़र गोंडवी…

फै़ज़ अहमद फै़ज़ की ग़ज़ल-हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए Har Haqeeqat Majaz Ho Jaye हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए काफ़िरों...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें(10): जाँ निसार अख़्तर और ज़ौक़…

जाँ निसार अख़्तर की ग़ज़ल: अशआ'र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं (Ashaar mere yoon to zamane ke liye...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (9): मुनीर नियाज़ी और अमीर मीनाई….

मुनीर नियाज़ी की ग़ज़ल: ज़िंदा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या (Zinda Rahen To Kya Mar...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें(8): अहमद फ़राज़ और बहज़ाद लखनवी…

Ab Aur Kya Kisi Se Marasim Badhayen Hum अहमद फ़राज़ की ग़ज़ल: अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएँ हम...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें(7): जाँ निसार अख़्तर और महशर बदायूँनी…

Aahat Si Koi Aaye To Lagta Hai Ke Tum Ho जाँ निसार अख़्तर की ग़ज़ल: आहट सी कोई आए तो...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (6): जिगर मुरादाबादी और इरफ़ान सिद्दीक़ी…

दो शा'इर, दो ग़ज़लें सीरीज़ में हम आज आपके सामने जिगर मुरादाबादी और इरफ़ान सिद्दीक़ी की ग़ज़लें पेश कर रहे...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (5): जलील मानिकपुरी और परवीन शाकिर…

Jalil Manikpuri Parveen Shakir ~ उर्दू शा'इरी के जिन दो शा'इरों की ग़ज़लें हम आज पेश कर रहे हैं, वो...

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (4): ग़ालिब और ज़ौक़…

Ghalib Aur Zauq ki Ghazalen ~ “साहित्य दुनिया” केटेगरी के अंतर्गत “दो शा’इर, दो ग़ज़लें” सिरीज़ में हम आज जिन...