अदा पर ख़ूबसूरत शायरी और बेहतरीन शेर
अदा, नाज़ और अंदाज़ को उर्दू शायरी में मोहब्बत और हुस्न के बेहद दिलकश रूपों के तौर पर बयान किया गया है। किसी की मुस्कान, निगाह, अंगड़ाई या बात करने के अंदाज़ में छिपी खूबसूरती को शायरों ने अपने अशआर में अलग-अलग रंगों में पेश किया है।
इस पेज पर अदा, नाज़ और हुस्न से जुड़े मशहूर शायरों के चुनिंदा और ख़ूबसूरत शेर प्रस्तुत हैं। इनमें मिर्ज़ा ग़ालिब, मीर तक़ी मीर, शकील बदायूनी, साहिर लुधियानवी, अकबर इलाहाबादी, बशीर बद्र जैसे शायरों के अशआर शामिल हैं।
अदा, नाज़ और अंदाज़ पर बेहतरीन शेर
अपनी ही तेग़-ए-अदा से आप घायल हो गया
चाँद ने पानी में देखा और पागल हो गया
मुनीर नियाज़ी (Munir Niazi)
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ज़माना हुस्न नज़ाकत बला जफ़ा शोख़ी
सिमट के आ गए सब आपकी अदाओं में
कालीदास गुप्ता रज़ा (Kalidas Gupta Raza)
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तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो
आ जाएगा पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना
शकील बदायूनी (Shakeel budayuni)
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ख़ूब-रू हैं सैकड़ों लेकिन नहीं तेरा जवाब
दिलरुबाई में अदा में नाज़ में अंदाज़ में
लाला माधव राम जौहर (Lala Madhav Ram Jauhar)
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कुछ इस अदा से आपने पूछा मिरा मिज़ाज
कहना पड़ा कि शुक्र है परवरदिगार का
जलील मानिकपूरी (Jaleel Manikpuri)
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सूरत तो इब्तिदा से तिरी ला-जवाब थी
नाज़-ओ-अदा ने और तरह-दार कर दिया
जलील मानिकपूरी (Jaleel Manikpuri)
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आपने तस्वीर भेजी मैंने देखी ग़ौर से
हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं
जलील मानिकपूरी (Jaleel Manikpuri)
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इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib)
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अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो
और ये भी देखते हैं कोई देखता न हो
निज़ाम रामपुरी (Nizam Rampuri)
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जो तिरे दिल को लुभाए वो अदा मुझ में नहीं
क्यूँ न तुझ को कोई तेरी ही अदा पेश करूँ
साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi)
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ये जो सर नीचे किए बैठे हैं
जान कितनों की लिए बैठे हैं
जलील मानिकपूरी (Jaleel Manikpuri)
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अदा आई जफ़ा आई ग़ुरूर आया हिजाब आया
हज़ारों आफ़तें ले कर हसीनों पर शबाब आया
नूह नारवी (Noor Naarvi)
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जान लेनी थी साफ़ कह देते
क्या ज़रूरत थी मुस्कुराने की
अज्ञात (Unknown)
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तुझको देखा न तिरे नाज़-ओ-अदा को देखा
तेरी हर तर्ज़ में इक शान-ए-ख़ुदा को देखा
मिर्ज़ा मायल देहलवी (Mirza Mayal Dehlvi)
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दुश्मन के घर से चल के दिखा दो जुदा जुदा
ये बाँकपन की चाल ये नाज़-ओ-अदा की है
बेख़ुद देहलवी (Bekhud Dehlvi)
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पहले इस में इक अदा थी नाज़ था अंदाज़ था
रूठना अब तो तिरी आदत में शामिल हो गया
आग़ा शाएर क़ज़लबाश (Aagha Shaer Qazalbaash)
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आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है
अमीर मीनाई (Ameer Minai)
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आपने तस्वीर भेजी मैंने देखी ग़ौर से
हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं
जलील मानिकपूरी (Jaleel Manikpuri)
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निगाहें इस क़दर क़ातिल कि उफ़-उफ़
अदाएँ इस क़दर प्यारी कि तौबा
आरज़ू लखनवी (Arzoo Lucknowi)
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अंगड़ाई भी वो लेने न पाए उठा के हाथ
देखा जो मुझको छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ
निज़ाम रामपुरी (Nizaam Rampuri)
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हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना
अकबर इलाहाबादी (Akbar Allahabadi)
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पूछा जो उनसे चाँद निकलता है किस तरह
ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ
आरज़ू लखनवी (Aarzoo Lucknowi)
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गुल हो महताब हो आईना हो ख़ुर्शीद हो मीर
अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो
मीर तक़ी मीर (Meer Taqi Meer)
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नाज़ है गुल को नज़ाकत पे चमन में ऐ ‘ज़ौक़’
उसने देखे ही नहीं नाज़-ओ-नज़ाकत वाले
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़ (Zauq Ibrahim Zauq)
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