मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है – सलीम कौसर

सलीम कौसर

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ मैं नसीब हूँ किसी और का मुझे माँगता कोई और है अजब ए’तिबार ओ बे-ए’तिबारी के दरमियान है ज़िंदगी मैं क़रीब हूँ किसी और … Read more

उर्दू शायरी और शब्द: हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

है और हैं का प्रयोग Urdu Ke Mushkil Shabd Urdu Hindi Nuqte Wale हिन्दी व्याकरण इ और ई Ghazal Kya hai Children Story in Hindi

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें “हालातों”, “जज़्बातों” या “अल्फ़ाज़ों” का इस्तेमाल होता है जबकि ये पूरी तरह से ग़लत है। हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे कारण क्या है। अस्ल में “हाल” शब्द का अर्थ होता है “अवस्था” या “स्थिति” (condition)। इस … Read more

तीसरी क़सम – फणीश्वरनाथ रेणु

Phaneeshwar Nath Renu

हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार मोरंगराज नेपाल से धान और लकड़ी ढो चुका है। कंट्रोल के ज़माने में चोरबाज़ारी का माल इस पार से उस पार पहुँचाया है। लेकिन कभी तो ऐसी गुदगुदी नहीं लगी पीठ में! कंट्रोल का … Read more

कोलुशा – मैक्सिम गोर्की

मैक्सिम गोर्की की कहानी – कोलुशा क़ब्रिस्तान का वह कोना, जहाँ भिखारी दफ़नाये जाते हैं। पत्तों से छितरे, बारिश से बहे और आँधियों से जर्जर क़ब्रों के ढूहों के बीच, दो मरियल-से बर्च वृक्षों के जालीदार साये में, जिघम के फटे-पुराने कपड़े पहने और सिर पर काली शॉल डाले एक स्त्री एक क़ब्र के पास … Read more

भिखारिन – रबीन्द्रनाथ टैगोर

Bhikharin Rabindranath Tagore – अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती और नम्रता से कहती- “बाबूजी, अन्धी पर दया हो जाए” वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रध्दालु हुआ करते हैं। उसका यह अनुमान असत्य न था। आने-जाने … Read more

इतना मालूम है!

Parveen Shakir Best Sher

अपने बिस्तर पे बहुत देर से मैं नीम-दराज़ सोचती थी कि वो इस वक़्त कहाँ पर होगा मैं यहाँ हूँ मगर उस कूचा-ए-रंग-ओ-बू में रोज़ की तरह से वो आज भी आया होगा और जब उसने वहाँ मुझको न पाया होगा! आपको इल्म है वो आज नहीं आई हैं? मेरी हर दोस्त से उसने यही … Read more

जुस्तुजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने – शहरयार

Chaand Shayari Ishq ab meri jaan hai goya - Jaleel Manikpuri

Justju jiski thi usko to na paaya humne जुस्तुजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने सब का अहवाल वही है जो हमारा है आज ये अलग बात कि शिकवा किया तन्हा हमने ख़ुद पशीमान हुए ने उसे शर्मिंदा किया इश्क़ की वज़्अ को क्या ख़ूब निभाया … Read more

रोज़ – अज्ञेय

Best Urdu Rubai Shaam Shayari Har Haqeeqat Majaz Ho Jaye Tagore ki Kahani Bhikharin Parveen Shakir Shayari

Agyeya Ki Kahani Roz लेखक – अज्ञेय ___________ दोपहरिए में उस घर के सूने आँगन में पैर रखते ही मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके वातावरण में कुछ ऐसा अकथ्य, अस्पृश्य, किंतु फिर भी बोझिल और प्रकंपमय और घना-सा फैल रहा था…। मेरी आहट सुनते ही … Read more

रेत पर सफ़र का लम्हा – अहमद शमीम

Saleem Sarmad Shayari

Ret Par Safar Ka Lamha रेत पर सफ़र का लम्हा – अहमद शमीम कभी हम ख़ूब-सूरत थे किताबों में बसी ख़ुश्बू की सूरत साँस साकिन थी बहुत से अन-कहे लफ़्ज़ों से तस्वीरें बनाते थे परिंदों के परों पर नज़्म लिख कर दूर की झीलों में बसने वाले लोगों को सुनाते थे जो हम से दूर … Read more

शायरी की बातें…

Ameer Minai Best Sher

ग़ज़ल क्या है? मुसल्लस जब कोई कविता तीन-तीन मिसरों के बंदों में बँटी होती है, तो उसे मुसल्लस कहा जाता है। इसमें शेरों के रदीफ़-काफ़िए की बनावट के आधार पर कई किस्में होती हैं। कभी तीनों मिसरे एक जैसे रदीफ़-काफ़िए में होते हैं, तो कभी पहले दो एक जैसे होते हैं और तीसरा अलग। लेकिन … Read more