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Father's Day Poetry In Hindi Satyajeet Ray Ki Kahani Sahpathi Satyajit Ray ki SahpathiFather's Day Poetry In Hindi

Father’s Day Poetry In Hindi

माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है

अंजुम सलीमी (Anjum Salimi)
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बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं

इफ़्तिख़ार आरिफ़ (Iftikhar Arif)
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ
इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा

मुनव्वर राना (Munawwar Rana)
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सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है
जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माओं की

हम्माद नियाज़ी (Hammad Niazi)
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किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए
कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया

अंजुम सलीमी (Anjum Salimi)
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घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में

क़ैसर-उल जाफ़री (Qaiser Ul Jafri)
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हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब
पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने

मेराज फ़ैज़ाबादी (Meraj Faizabadi)
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माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे ने’मत

अल्ताफ़ हुसैन हाली (Altaf Hussain Hali)
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अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ से
ये बात सच है मिरा बाप कम नहीं माँ से

ताहिर शहीर (Tahir Shaheer)
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मुझको थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते

मेराज फ़ैज़ाबादी (Meraj Faizabadi)
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बच्चे मेरी उँगली थामे धीरे धीरे चलते थे
फिर वो आगे दौड़ गए मैं तन्हा पीछे छूट गया

ख़ालिद महमूद (Khalid Mehmood)
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मेरा भी एक बाप था अच्छा सा एक बाप
वो जिस जगह पहुँच के मरा था वहीं हूँ मैं

रईस फ़रोग़ (Raees Farogh)
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जब भी वालिद की जफ़ा याद आई
अपने दादा की ख़ता याद आई

मोहम्मद यूसुफ़ पापा (Mohd Yousuf Papa)
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वो पेड़ जिसकी छाँव में कटी थी उम्र गाँव में
मैं चूम चूम थक गया मगर ये दिल भरा नहीं

हम्माद नियाज़ी (Hammad Niazi)
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हड्डियाँ बाप की गूदे से हुई हैं ख़ाली
कम से कम अब तो ये बेटे भी कमाने लग जाएँ

रऊफ़ ख़ैर (Rauf Khair)
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बाप बोझ ढोता था क्या जहेज़ दे पाता
इस लिए वो शहज़ादी आज तक कुँवारी है

मंज़र भोपाली (Manzar Bhopali)
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मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ
सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया

हम्माद नियाज़ी (Hammad Niazi)
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मैंने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग
अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए

शकील जमाली (Shakeel Jamali)
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बाप का है फ़ख़्र वो बेटा कि रखता हो कमाल
देख आईने को फ़रज़ंद-ए-रशीद-ए-संग है

मीर मोहम्मदी बेदार (Meer Mohammadi Bedar)
~ Father’s Day Poetry In Hindi

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