मुझसे पहली सी मुहब्बत मिरी महबूब न माँग

Mujhse Pahli Si Muhabbat मुझसे पहली सी मुहब्बत मिरी महबूब न माँग मैंने समझा था कि तू है तो दरख़्शाँ है हयात तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है तू जो मिल जाए तो तक़दीर … Read more

तसव्वुर – कैफ़ी आज़मी

Tasavvur Kaifi Azmi ये किस तरह याद आ रही हो ये ख़्वाब कैसा दिखा रही हो कि जैसे सच-मुच निगाह के सामने खड़ी मुस्कुरा रही हो ये जिस्म-ए-नाज़ुक, ये नर्म बाहें, हसीन गर्दन, सिडौल बाज़ू शगुफ़्ता चेहरा, सलोनी रंगत, घनेरा जूड़ा, सियाह गेसू नशीली आँखें, रसीली चितवन, दराज़ पलकें, महीन अबरू तमाम शोख़ी, तमाम बिजली, … Read more

ऐसा हो सकता है तुम आ जाओ..

Aisa Ho Sakta Hai Tum Aa Jao ऐसा हो सकता है तुम आ जाओ इस नयी रात की ख़मोशी में, इक जवाँ ख्व़ाब मचलता होगा, तुम किसी बात पे रूठी होगी, दिल किसी बात पे चलता होगा तुम बहुत दूर हो मुझसे लेकिन, ऐसा लगता है कि ये मुमकिन है, तुम अभी ख्व़ाब की दीवारों … Read more

अभी तो मैं जवान हूँ – हफ़ीज़ जालंधरी

Abhi to main jawan hoon – Hafeez Jalandhari हवा भी ख़ुश-गवार है गुलों पे भी निखार है तरन्नुम-ए-हज़ार है बहार पुर-बहार है कहाँ चला है साक़िया इधर तो लौट इधर तो आ अरे ये देखता है क्या उठा सुबू सुबू उठा सुबू उठा प्याला भर प्याला भर के दे इधर चमन की सम्त कर नज़र … Read more

मादाम – साहिर लुधियानवी

Sahir Ludhianvi Top Ghazals

Madam Sahir Ludhiyanwi नोट – उर्दू में “मैडम” को “मादाम” भी कहा जाता है। आप बे-वज्ह परेशान सी क्यूँ हैं मादाम लोग कहते हैं तो फिर ठीक ही कहते होंगे मेरे अहबाब ने तहज़ीब न सीखी होगी मेरे माहौल में इंसान न रहते होंगे नूर-ए-सरमाया से है रू-ए-तमद्दुन की जिला हम जहाँ हैं वहाँ तहज़ीब … Read more

फ़िलिस्तीनी बच्चे के लिए लोरी ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Filisteeni Bachche ke liye lori फ़िलिस्तीनी बच्चे के लिए लोरी ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ मत रो बच्चे रो-रो के अभी तेरी अम्मी की आँख लगी है मत रो बच्चे कुछ ही पहले तेरे अब्बा ने अपने ग़म से रुख़्सत ली है मत रो बच्चे तेरा भाई अपने ख़्वाब की तितली पीछे दूर कहीं परदेस गया … Read more

मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें ~ रम्ज़

Mere kamre ko sajane ki tamanna

Mere kamre ko sajane ki tamanna hai tumhen ~ जौन एलिया नज़्म- रम्ज़ (जौन एलिया) तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया … Read more

अख़्तर शीरानी की नज़्म ‘ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर’

Aye Ishq Humen Barbaad Na Kar

Aye Ishq Humen Barbaad Na Kar ~ Akhtar Shirani ऐ इश्क़ न छेड़ आ आ के हमें, हम भूले हुओं को याद न कर पहले ही बहुत नाशाद हैं हम, तू और हमें नाशाद न कर क़िस्मत का सितम ही कम नहीं कुछ, ये ताज़ा सितम ईजाद न कर यूँ ज़ुल्म न कर बे-दाद न … Read more

ख़्वाब ~ परवीन शाकिर

Parveen Shakir Best Sher

परवीन शाकिर की नज़्म – ख़्वाब खुले पानियों में घिरी लड़कियाँ नर्म लहरों के छींटे उड़ाती हुई बात-बे-बात हँसती हुई अपने ख़्वाबों के शहज़ादों का तज़्किरा कर रही थीं जो ख़ामोश थीं उनकी आँखों में भी मुस्कुराहट की तहरीर थी उनके होंटों को भी अन-कहे ख़्वाब का ज़ाइक़ा चूमता था! आने वाले नए मौसमों के … Read more

Mother’s Day Special: ज़हरा निगाह की नज़्म “डाकू”…

Zehra Nigah Ki Nazm Daku

“मातृ दिवस” (Mothers Day) के मौक़े पर हम अपने पाठकों के लिए ज़हरा निगाह की नज़्म “डाकू” (Zehra Nigah Ki Nazm Daku) पेश कर रहे हैं. ये नज़्म माँ-बेटे के रिश्ते को माँ की नज़र से दिखाने की कोशिश करती है. ज़हरा निगाह की नज़्म: डाकू कल रात मिरा बेटा मिरे घर, चेहरे पे मंढे … Read more