शा’इरी की बातें(8): वज़्न करने का तरीक़ा (5)

वज़्न की बातें सिरीज़ में हमने आपको पहले ही बताया है कि कोई भी शेर तब तक शेर नहीं हो सकता जब तक कि उसका वज़्न ठीक न हो. हम जानते हैं कि एक शेर के दोनों मिसरों का वज़्न एक ही होना चाहिए, अगर ये अलग होता है तो शेर बे-वज़्नी हो जाएगा. इसके बारे में हम बेसिक जानकारी आपको दे ही चुके हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे अलफ़ाज़ के बारे में बता रहे हैं जिनका वज़्न होता तो 21 है लेकिन ग़लती से कुछ लोग इनका वज़्न 12 ले लेते हैं.

ऐसा ही एक लफ़्ज़ है “शहर”– असल में शहर के बोलने पर अगर ध्यान दें तो “श” और “ह” एक साथ ही पढ़ने में आता है “शह्” और इसके बाद “र” की आवाज़ आती है. ऐसे में “शह्” को हम 2 लेंगे और “र” को 1. इसी तरह से अगर देखें तो “बहर” भी एक लफ़्ज़ है जिसका वज़्न 21 होता है.इसको भी पढ़ते समय पहले “बह्” पढ़ने में आता है और फिर ““. इसी वजह से इसका वज़्न भी 21 होगा.

इस फ़ेहरिस्त में कई ऐसे लफ़्ज़ हैं जो शुरू किसी अक्षर से होते हैं और उसके ठीक बाद “” आता है और आख़िर में ““, ऐसे लफ़्ज़ों को अमूमन 21 वज़्न ही मिलता है. जैसे- महर [(مہر), इसका अर्थ है सूरज] ,ज़हर (زہر), बहर [(بحر) बहर का मतलब है समुद्र/छंद,शेर का वज़्न] , क़हर[(قہر) का अर्थ है आफ़त], नहर, दहर ,लहर, इत्यादि.

आपको बता दें कि इन सभी लफ़्ज़ों को जब पढ़ेंगे तो पहले वाले अक्षर के साथ ही “ह” को पढ़ेंगे. इसी के साथ एक बात ये भी साफ़ हो जाती है कि ये सभी अलफ़ाज़ हम-क़ाफ़िया होंगे. अब इसमें एक बात और समझने की है कि ये सभी अलफ़ाज़ उन अलफ़ाज़ के हम-क़ाफ़िया नहीं होंगे जिनका वज़्न 12 होता है. जैसे सफ़र, ख़बर, मगर, डगर, नगर, इत्यादि. इसका मतलब है कि ‘ख़बर’ और ‘शहर’ कभी भी हम-क़ाफ़िया नहीं होंगे क्यूँकि ख़बर का वज़्न 12 है और शहर का 21 है.

नोट- शहर को 12 वज़्न पर दुष्यंत कुमार ने लिया है लेकिन इसे उस्ताद शा’इर सही नहीं मानते हैं.
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रोज़ की तरह आज भी हम एक शेर की तक़ती’अ करके दिखा रहे हैं.
शेर:
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं. (इक़बाल)

इस शेर को तक़ती’अ करके देखिये-
सि-1, ता-2, रों-2, से-1, आ-2, गे-2, ज-1, हाँ-2, औ-2,र-1, भी-2, हैं-2
अ-1, भी-2, इश्-2, क़-1, के-2, इम्-2, ति-1, हाँ-2 औ-2 र-1, भी-2, हैं-2

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