गर्लफ्रेंड के लिए मुहब्बत और तारीफ़ के बेहतरीन शेर

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अपनी गर्लफ्रेंड या महबूबा की तारीफ़ के लिए सही अल्फ़ाज़ तलाशना आसान नहीं होता। मुहब्बत और शायरी का रिश्ता सदियों पुराना है और शायरों ने हुस्न, चाहत, इश्क़ और दिलरुबाई के एहसास को बेहद खूबसूरत शेरों में बयान किया है।

इस पेज पर महबूबा और प्रेमिका की तारीफ़ में कहे गए चुनिंदा बेहतरीन शेर पेश किए गए हैं। इनमें बशीर बद्र, मीर तक़ी मीर, परवीन शाकिर, साहिर लुधियानवी और दूसरे मशहूर शायरों के अशआर शामिल हैं। आप इन शेरों को अपनी मुहब्बत और अपनी महबूबा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। 

गर्लफ्रेंड और महबूबा की तारीफ़ में बेहतरीन शेर

 

डाइरी में सारे अच्छे शेर चुन कर लिख लिए
एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया

ऐतबार साजिद
~

हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ सा
जो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे

बशीर बद्र
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हुस्न आफ़त नहीं तो फिर क्या है
तू क़यामत नहीं तो फिर क्या है

जलील मानिकपूरी
~

हुस्न इक दिलरुबा हुकूमत है
इश्क़ इक क़ुदरती ग़ुलामी है

अब्दुल हमीद अदम
~

कमसिन हो तुम हसीन हो तुम दिलरुबा हो तुम
तुमको सितम रवा है मगर इस क़दर नहीं

जलील मानिकपूरी
~

ज़रा ज़रा सी शिकायत पे रूठ जाते हैं
नया नया है अभी शौक़ दिलरुबाई का

जलील मानिकपूरी
~

दिल-रुबा तुझ सा जो दिल लेने में अय्यारी करे
फिर कोई दिल्ली में क्या दिल की ख़बरदारी करे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

~
ख़ूब-रू हैं सैकड़ों लेकिन नहीं तेरा जवाब
दिलरुबाई में अदा में नाज़ में अंदाज़ में

लाला माधव राम जौहर

~
नाचती है जब तू अपने दिलरुबा अंदाज़ से
आफ़रीं के नग़्मे उठते हैं दिलों के साज़ से

कशफ़ी मुल्तानी

~
की दिल ने दिल-बरान-ए-जहाँ की बहुत तलाश
कुइ दिल-रुबा मिला है न दिल-ख़्वाह क्या करे

मिर्ज़ा जवाँ बख़्त जहाँदार

~

इक लड़का था इक लड़की थी
आगे अल्लाह की मर्ज़ी थी

मुहम्मद अल्वी

~
इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ
उससे आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ

मीर तक़ी मीर

~
अपनी अना की आज भी तस्कीन हमने की
जी भर के उसके हुस्न की तौहीन हमने की

इक़बाल साजिद

~

हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

परवीन शाकिर

~
तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है

साहिर लुधियानवी
~

मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर
मुस्कुराना न भूल जाया करो

अब्दुल हमीद अदम
~

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