ख़ूबसूरत तस्वीरों और जानकारियों से मन मोहती है “लद्दाख़”

Laddakh Review Mahendra Singh

Laddakh Review Mahendra Singh ~ कहते हैं अगर आपको ख़ुद को पहचानना हो तो यात्रा करनी चाहिए। अक्सर हम ख़ुद से मुलाक़ात कर पाते हैं जब हम यात्रा में होते हैं, आने वाली तरह-तरह की परिस्थितियों में हमारा व्यवहार किस तरह का होता है और हम किस तरह से उन परिस्थितियों को समझते हैं और उनके साथ संतुलन बनाते हैं, ये सभी अनुभव यात्रा के दौरान होता है। और एक बात भी जो यात्रा हमें सिखाती है वो ये कि हम अपने परिवार के साथ किस तरह से जुड़े हुए हैं साथ ही परिवार के सदस्यों का व्यवहार कैसा है। आज के समय में ये कटु सत्य है कि घर में साथ रहते हुए हम अपने परिवार से उस तरह से नहीं मिल पाते जैसे हम किसी सफ़र के दौरान मिल पाते हैं।

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मन की भावनाओं के द्वार खोलता है रश्मि रविजा का कहानी संग्रह “बंद दरवाज़ों का शहर”

Band Darwazon Ka Shahar Review

Band Darwazon Ka Shahar Review ~ ‘बंद दरवाज़ों का शहर’ रश्मि रविजा (Rashmi Ravija) का कहानी संग्रह है। इस कहानी (Hindi Kahani) संग्रह में भावनाओं के अलग-अलग द्वार खुलते हैं, फिर वो चाहे प्रेम को ख़ुद से दूर करती तलाक़शुदा महिला हो या महानगर में दिनभर घर में अकेली बातों को तरसती स्त्री हो, एक … Read more

ज्ञान चतुर्वेदी की किताब “बारामासी” की समीक्षा

Baramasi Review

Baramasi Review ~ आज विश्व हास्य दिवस है। यूँ तो कई हास्य-व्यंग्य लिखने वाले लेखक देश में मौजूद हैं और उन्होंने साधारण से लेकर अति गम्भीर बातों को व्यंग्य के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाया है। व्यंग्य के नाम पर सबसे अधिक हरिशंकर परसाई को पढ़ा है। उनसे हटकर कोई व्यंग्य पहली बार पढ़ा … Read more

किश्वर देसाई की किताब “डार्लिंग जी” की समीक्षा

Darling Ji Review

Darling Ji Review ~ नर्गिस और सुनील दत्त की जोड़ी हमेशा एक आयडियल जोड़ी मानी जाती रही है…लेकिन उनके मिलने की कहानी भी किसी फ़िल्मी कहानी से कम पेंचीदा नहीं है….जहाँ एक ओर बचपन से अपनी माँ के कारण नर्गिस सिनेमा-जगत में आ चुकी थी। वहीँ सुनील दत्त, जिनका नाम बलराज दत्त हुआ करता था, … Read more

जौन एलिया की किताब “शायद” की समीक्षा

Jaun Elia Shayad Review

Jaun Elia Shayad Review ~  उर्दू शा’इरी में यूँ तो कई बड़े नाम सुनने को मिलते हैं लेकिन कुछ-एक नाम ऐसे हैं जो अक्सर आम लोगों की ज़ुबान पर रहते हैं. मौजूदा दौर में इसी तरह का एक नाम है जौन एलिया. जौन के चाहने वाले कहते हैं कि जौन अपनी ज़िन्दगी में इतने मशहूर … Read more

आचार्य चतुरसेन की किताब “ गोली” की समीक्षा

Acharya Chatursen Goli Review

Acharya Chatursen Goli Review :  आज हम यहाँ जिस पुस्तक की चर्चा करना चाहेंगे वो किताब है “गोली”। आचार्य चतुरसेन द्वारा लिखी इस पुस्तक मे राजस्थान की एक पुरानी परंपरा को दर्शाया गया है। इस किताब के अनुसार प्राचीन समय मे ऐसा रिवाज था कि समाज में निचले तबक़े से आने वाली लड़कियों को राजा … Read more

जावेद अख़्तर की किताब “तरकश” की समीक्षा

Tarkash Review

Tarkash Review: अक्सर हिंदी में शामिल उर्दू लफ़्ज़ों का सही प्रयोग और उनका उच्चारण सीखना मुश्किल लगता है। लेकिन जहाँ चाह वहाँ राह बस कुछ इसी तर्ज़ पर कुछ ऐसी पुस्तकों को पढ़ने का विचार आया, जिसमे हिंदी के साथ उर्दु लफ्ज़ शामिल हों और वो बहुत ज्यादा कठिन भी न हों…ऐसे में सबसे पहली … Read more

औड्रेय निफ़्फ़नेगर की किताब “द टाइम ट्रेवलर्स वाइफ़” की समीक्षा

The Time Traveler's Wife Review

The Time Traveler’s Wife Review –  ”द टाइम ट्रेवलर्स वाइफ़” जब इस किताब को पढ़ना शुरू किया तो मुझे ये बुक थोड़ी अजीब लगी। पर जैसे-जैसे किताब के पन्ने पलटते गए इस अजीब-सी लगने वाली बुक ने मुझे ख़ुद से बाँध लिया…जब भी समय मिलता इस किताब को पढ़ने में ही जाता और धीरे-धीरे न … Read more

ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा “जूठन” की समीक्षा

Joothan Review

Joothan Review पता ही नहीं था क्या होगा उसमें..कैसी होगी..अमूमन किताबों के पहले पाँच पन्नों से अनुमान लगाने की आदत है कि ये किताब कैसी होगी..शायद ये अच्छी आदत नहीं है..लेकिन जब पहले पाँच पन्ने बिना रुके पढ़े जाएँ तो मुझे लगता है कि आगे बढ़ना चाहिए..वैसे एक बार पढ़ने के लिए किताब उठाने के … Read more

गुलज़ार की किताब “ड्योढ़ी” की समीक्षा

Dyodhi Review

Dyodhi Review

“किताबों से कभी गुज़रो तो यूँ किरदार मिलते हैं
गए वक़्त की ड्योढ़ी में खड़े कुछ यार मिलते हैं”

बस कुछ इसी तरह कई किरदारों से मुलाक़ात हुई गुलज़ार की लिखी “ड्योढ़ी” को पढ़ते हुए. यूँ तो गुलज़ार के शब्दों को कई बार सुना है पर उन्हें पहली बार पढ़ा.
ड्योढ़ी कई छोटी कहानियों का संग्रह है और हर पहली कहानी दूसरी से बिलकुल अलग लगती है। इस एक संग्रह में गुलज़ार आपको कभी सीमा पार ले जाते हैं तो कभी आसमान की सैर करवाते हैं, कभी बचपन की मासूमियत से रुबरु करवाते हैं तो कभी फुटपाथ पर पलती ज़िन्दगी की मुश्किलों का अहसास करवाते हैं,कभी पहाड़ों की सैर करवाते हैं तो कभी आसमान में पतंग के साथ गोते लगवाते हैं। ज़िन्दगी में जिस तरह कई रंगों का समावेश है उसी तरह ये संग्रह भी आपको कभी ख़ुश, कभी भावुक तो कभी ठहाके मारने पर मजबूर करता है।

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