अरग़वान रब्बही
दिनों की लाशें — अरग़वान रब्बही
DinoN Ki LaasheN ~~ अरग़वान रब्बही ट्रेन की खिड़की से बाहर साथ-साथ चलते अंधेरों के बीच अंदर सोए लोगों की जागती नींदों की लोरियाँ मुझे भी सुलाने की कोशिश कर रही थीं, मगर मैं चाहकर भी सो नहीं सकता था क्योंकि मुझे अगले ही स्टेशन पर उतरना था… कुछ ही वक़्त में काले अंधेरे रास्ते … Read more
हिरोशिमा
Hindi Kahani Hiroshima (यह कहानी साहित्य दुनिया टीम के सदस्य/ सदस्यों द्वारा लिखी गयी है और इस कहानी के सर्वाधिकार साहित्य दुनिया के पास सुरक्षित हैं। बिना अनुमति के कहानी के किसी भी अंश, भाग या कहानी को अन्यत्र प्रकाशित करना अवांछनीय है। ऐसा करने पर साहित्य दुनिया दोषी के ख़िलाफ़ आवश्यक क़दम उठाने के … Read more
नामक का दरोग़ा – प्रेमचंद
जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वर-प्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड़-छोड़कर लोग इस विभाग की बर्क़-अंदाज़ी करते थे। … Read more
ऐसा हो सकता है तुम आ जाओ..
Aisa Ho Sakta Hai Tum Aa Jao ऐसा हो सकता है तुम आ जाओ इस नयी रात की ख़मोशी में, इक जवाँ ख्व़ाब मचलता होगा, तुम किसी बात पे रूठी होगी, दिल किसी बात पे चलता होगा तुम बहुत दूर हो मुझसे लेकिन, ऐसा लगता है कि ये मुमकिन है, तुम अभी ख्व़ाब की दीवारों … Read more
ताज़ा मुहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में है – परवीन शाकिर
ताज़ा मुहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में है फिर मौसम-ए-बहार मिरे गुल्सिताँ में है इक ख़्वाब है कि बार-ए-दिगर देखते हैं हम इक आश्ना सी रौशनी सारे मकाँ में है ताबिश में अपनी महर-ओ-मह-ओ-नज्म से सिवा जुगनू सी ये ज़मीं जो कफ़-ए-आसमाँ में है इक शाख़-ए-यासमीन थी कल तक ख़िज़ाँ-असर और आज सारा बाग़ उसी की … Read more
English Section
Shabbir Khan Lending Library ⸻ 1. History & Civilizations • The Wonder That Was India – A.L. Basham • The Wonder That Was India (Part II) – S.A.A. Rizvi • An Advanced History of India – Majumdar, Raychaudhuri & Datta • From Plassey to Partition and After – Sekhar Bandyopadhyay • India Since Independence – … Read more
“मैं गंगा प्रसाद की औरत हूँ”
Main Ganga Prasaad Ki Aurat Hoon लेखक- अरग़वान रब्बही रोज़ की तरह अपने दफ़्तर की तरफ़ जाते 8 सीट वाले विक्रम ऑटो में मनोज जैसे ही बैठा उसकी नज़र सामने की सीट पर बैठी एक पर्दानशीं औरत पर पड़ी, लाल साड़ी में लिपटी अधेड़ उम्र की औरत का घूँघट उसकी कमर तक था और उसकी … Read more
एक छोटी कहानी – जंगल
Jangal Short Story रेलवे स्टेशन बहुत देर से एक ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म नंबर एक पर खड़ी थी, वो देर से ये सोच रही थी कि ये ट्रेन जब प्लेटफ़ॉर्म छोड़ेगी तो उसकी ट्रेन आएगी. हालाँकि उसका ध्यान ट्रेन से भी ज़्यादा फ़ोन पर था, बार-बार वो मोबाइल देखती..उसके चहरे पर ज़ाहिरी थकान थी लेकिन whatsapp मेसेज … Read more