साहित्य दुनिया

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता …. निदा फ़ाज़ली

Nida Fazli Ki Shayari कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता तमाम शहर में...

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी…. बहादुर शाह ज़फ़र

Bahadur Shah Zafar Shayari बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी...

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया.. सुदर्शन फ़ाकिर

Sudarshan Fakir Shayari इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया...

ग़ज़ल में मक़ता क्या होता है?

मक़ता: ग़ज़ल का आख़िरी शे'र मक़ता कहलाता है.अक्सर इसमें शा'इर अपने तख़ल्लुस (pen name) का इस्तेमाल करता है. Ghazal Shayari...

उर्दू शायरी और शब्द: जावेद या ज़ावेद?

Javed ya Zaved ?: हमसे बहुत से सवाल ईमेल और सोशल मीडिया के ज़रिए पूछे जाते हैं. कुछ सवाल ऐसे...

अलफ़ाज़ की बातें (15): लखनऊ या लख़नऊ?

Urdu Shayari Lafz Lucknow: लखनऊ एक ऐसा शहर है जो पूरी दुनिया में अपनी ज़बान और तहज़ीब के लिए जाना...

शायरी सीखें: ग़ज़ल का मतला क्या होता है?

Ghazal ka Matla मत'ला: ग़ज़ल या क़सीदे का वो शे'र जिसके दोनों मिसरों में रदीफ़ और क़ाफ़िये का इस्तेमाल होता...