इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं…ज़हरा निगाह
Zehra Nigah इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं हमने जिस रस्ते पर...
Zehra Nigah इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं हमने जिस रस्ते पर...
Nida Fazli Ki Shayari कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता तमाम शहर में...
Bahadur Shah Zafar Shayari बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी...
Sudarshan Fakir Shayari इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया...
'ष' wale shabd (ष से शुरू होने वाले शब्द) पढ़ने का तरीक़ा: शब्द (वज़्न) सभी अर्थ षंड(21)- साँड षंडाली(222)- तलैया...
मक़ता: ग़ज़ल का आख़िरी शे'र मक़ता कहलाता है.अक्सर इसमें शा'इर अपने तख़ल्लुस (pen name) का इस्तेमाल करता है. Ghazal Shayari...
Javed ya Zaved ?: हमसे बहुत से सवाल ईमेल और सोशल मीडिया के ज़रिए पूछे जाते हैं. कुछ सवाल ऐसे...
Urdu Shayari Lafz Lucknow: लखनऊ एक ऐसा शहर है जो पूरी दुनिया में अपनी ज़बान और तहज़ीब के लिए जाना...
Ghazal ka Matla मत'ला: ग़ज़ल या क़सीदे का वो शे'र जिसके दोनों मिसरों में रदीफ़ और क़ाफ़िये का इस्तेमाल होता...
क़ाफ़िया (Qafiya Kya Hai) ग़ज़ल के हर शेर के दूसरे मिसरे में रदीफ़ से ठीक पहले आने वाले वो शब्द...