दो शाइर, दो ग़ज़लें (23): राजेन्द्र मनचंदा बानी और अहमद फ़राज़
(अहमद फ़राज़ मनचंदा बानी) राजेन्द्र मनचंदा “बानी” की ग़ज़ल ऐ दोस्त मैं ख़ामोश किसी डर से नहीं था क़ाइल ही…
राईशा लालवानी की किताब “The diary on the Fifth Floor” की समीक्षा
The diary on the Fifth Floor Review ~ Raisha Lalwani इन दिनों हम कितनी बेवजह की उलझनों में उलझे रहते…
घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का पाँचवा भाग
15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब…
घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का चौथा भाग
15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब…
घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का तीसरा भाग
15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब…
घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का दूसरा भाग
15 साल तक एक साथ रहने की वजह से पत्नी ने कभी पति के नाम कोई चिट्ठी न लिखी, अब…
घनी कहानी, छोटी शाखा: रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का पहला भाग
श्रीचरणकमलेषु, आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे…
‘आपका बंटी’- मन्नू भंडारी (समीक्षा)
Aapka Bunty Review ~ “बस चली तो सबके बीच हँसते-बतियाते उसे ऐसा लगा जैसे सारे दिन ख़ूब सारी पढ़ाई करके…
मैक्सिम गोर्की की कहानी ‘कोलुशा’ का अंतिम भाग
Maxim Gorky Hindi Kolusha अब तक आपने पढ़ा- एक क़ब्र के पास बैठी औरत को देख कर लेखक के मन…
मैक्सिम गोर्की की कहानी ‘कोलुशा’ का पहला भाग
Maxim Gorky Hindi Kahani : क़ब्रिस्तान का वह कोना, जहाँ भिखारी दफ़नाये जाते हैं। पत्तों से छितरे, बारिश से बहे…